काशी तमिल संगमम 4.0 के तहत वाराणसी के नमो घाट पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में काशी और तमिलनाडु के कलाकारों ने गायन, नृत्य और लोक कलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।
वाराणसी। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज एवं दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, तंजावूर (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा आयोजित काशी तमिल संगमम 4.0 के अंतर्गत 12वें दिन नमो घाट स्थित मुक्ताकाशी प्रांगण में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर काशी एवं तमिलनाडु के कलाकारों ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से दर्शकों को भारतीय संस्कृति की विविधता से रूबरू कराया।
कार्यक्रम की प्रथम प्रस्तुति मित्तल पाल एवं दल, वाराणसी द्वारा प्रस्तुत बिरहा गायन से आरंभ हुई। इस प्रस्तुति में हारमोनियम पर हिमाचल सिंह, ढोलक पर विजय कुमार, झाल पर सुभाष चंद्र, करताल पर इंद्रेश तथा सहगायन में ओम प्रकाश ने प्रभावी संगत की।

द्वितीय प्रस्तुति में तमिलनाडु से पधारे श्रीवाश्री स्कंद प्रसाद एवं दल ने सुमधुर गायन प्रस्तुत किया। उनके साथ गायन में सरकाजी एच. स्कंद प्रसाद, तबला पर जयदेव एवं हारमोनियम पर गौरव ने संगत की।
तृतीय प्रस्तुति में डॉ. मधुमिता भट्टाचार्य एवं दल, वाराणसी द्वारा शास्त्रीय गायन की मनोहारी प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम का आरंभ राग यमन (द्रुत ख्याल, तीनताल) में “सुखदाता सबन के शंकर…” से हुआ। इसके पश्चात दादरा “कैसा जादू डारा…” प्रस्तुत किया गया। गायन का समापन भजन “दो दिन का जग में मेला…” से हुआ। इस प्रस्तुति में तबला पर ज्ञान स्वरूप मुखर्जी एवं हारमोनियम पर हर्षित पाल ने संगत की।

चतुर्थ प्रस्तुति तमिलनाडु के टी. तुलसी रमन एवं दल द्वारा प्रस्तुत सिलबट्टम लोक नृत्य की रही, जिसने दर्शकों को दक्षिण भारतीय लोक संस्कृति से परिचित कराया।
पंचम प्रस्तुति में डॉ. ममता टंडन एवं रवि शंकर मिश्र द्वारा कथक नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई। इस दौरान तबला पर पं. भोलानाथ मिश्र, पखावज पर अवंतिका महाराज, बांसुरी पर प्रांजल सिंह, गायन में गौरव मिश्र तथा बोल पड़ंत पर मांडवी सिंह ने संगत की।

कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति तमिलनाडु के एम. वर्द्धराज एवं दल द्वारा प्रस्तुत तमिल लोक नृत्य की रही, जिसने दर्शकों को झूमने पर विवश कर दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन सुजीत कुमार चौबे ने किया।
