वाराणसी : देश में पिछले कुछ वर्षों से मंहगाई और बेरोजगारी चरम पर है और सरकार का इस पर कोई नियंत्रण नहीं है। उक्त बाते मंगलवार को युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष एवं अधिवक्ता विकास सिंह ने कही।
उन्होंने कहा जिस प्रकार से विगत दिनों तीन बार पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी हुई है, उससे स्पष्ट है कि सरकार का महंगाई पर कोई नियंत्रण नहीं है। सरकार इस पर नियंत्रण करने में पूरी तरह से विफल है। वहीं बेरोजगारी दिनोदिन बढ़ रही है। नौकरी के लिए युवा भटक रहा है और हमारे देश का शीर्ष नेतृत्व इन युवा पीढ़ी को रोजगार देने में पूरी तरह से निष्क्रिय है। हमारे देश में युवाओं को रोजगार के लिए कोई अवसर ही नहीं है।
सरकारी नौकरियों का कोई भी वांट नहीं निकल रहा है, ताकि युवाओं को रोजगार का अवसर मिल सकें। देश का सर्वोच्च नेतृत्व केवल देश में जुमलेबाजी में व्यस्त हैं, उसको देश की समस्या दूर करने में कोई रुचि न है, वह तो केवल विदेशों में महिलाओं को गिफ्ट बांटने में व्यस्त है। जबकि देश की जनता बेरोजगारी और महंगाई से त्रस्त है।
विकास सिंह ने कहा कि हम सरकार की नाकामी के बारे यदि आवाज उठाएंगे तो हमारे ऊपर फर्जी मुकदमे लाद दिए जाएंगे। यदि हम अपने देश के शीर्ष नेतृत्व से सवाल नहीं करेंगे तो किस्से करेंगे। हमारे प्रधानमंत्री हर बात के लिए कांग्रेस और नेहरू, सोनिया गांधी, राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराते है, लेकिन पिछले 12 साल से वे सरकार चला रहे है, लेकिन रुपया लगातार गिर रहा है, देश की अर्थव्यवस्था दिनोदिन बिगड़ रही है, लेकिन प्रधानमंत्री जी इसके लिए अपने सरकार का दोष न मानकर कांग्रेस पर दोषारोपण करने में व्यस्त है।
नोटबंदी किसलिए हुई आज तक यह नहीं बता पाए और कितना काला धन विदेशों से लाए इसका भी आजतक कोई जवाब नहीं दे पाए। मीडिया के सवालों और सच का सामना करने से बचने के लिए आजतक एक भी प्रेस कांफ्रेंस कर सीधे सवालों का जवाब नहीं दिया, क्योंकि कहीं ऐसा न हो कि देश की जनता के सामने पोल खुल जाए। आज मैने सवाल खड़ा किया है, हो सकता है कल मेरे खिलाफ भी कोई मुकदमा फर्जी ढंग से दर्ज कर मुझे भी जेल में डाल दिया जाए। देश की जो बेसिक जरूरत है रोटी, कपड़ा और मकान उसको पूरा करना तो छोड़िए, लोगों के बसे बसाए आशियाने को उजाड़ने में व्यस्त है।
मंदिर बनाना अच्छी बात है, लेकिन देश के युवाओं को रोजगार भी उपलब्ध कराना उतना ही आवश्यक है। आज मैं एक सवाल आप सभी से करता हूं। ईमानदारी से उसका जवाब खुद को दीजिएगा कि जिस प्रकार सेना में पांच साल के लिए अग्निवीर योजना के तहत लोगों को भर्ती किया गया, यदि पांच साल बाद एक परफेक्ट ट्रेनिंग लेने वाले युवा को रोजगार नहीं मिला और वो गलत निर्णय ले लिया तो उसका परिणाम क्या होगा? इसका जवाब आप खुद सोचिएगा। मैं बस यह कहना चाहता हूं कि यदि आप सत्ता में बैठे है तो जनता के हित भी आपको ही सोचना होगा। आज आप देश के अधिकत्तर राज्यों में सरकार में है, लेकिन क्या उन राज्यों के युवाओं को रोजगार मिला, क्या उन राज्यों में महंगाई और भ्रष्टाचार कम है।
विकास सिंह ने कहा कि हम सभी देश की सरकार के साथ है, लेकिन गलत होने पर सवाल उठाना हमारा नैतिक और संवैधानिक अधिकार है। हम देश की जनता है और हमें हमारे प्रधानमंत्री से सवालों का जवाब चाहिए। उन्होंने कहा कि आप को भी पता था देश में महिला आरक्षण पास नहीं हो पाएगा और आपने साजिश के तहत उसे संसद में पेश किया और सारा ठीकरा विपक्ष पर फोड़ दिया, लेकिन जो पढ़े लिखे लोग है, वो जानते है कि इसमें क्या खेल है। इसे में सार्वजनिक मंच पर बोलना उचित नहीं समझता। खैर ये पब्लिक है, ये सब जानती है। ज्यादा दिन झूठ की राजनीति नहीं हो सकती और एक दिन जरूर जनता आपसे सवाल पूछेगी और उस दिन शायद आपके सामने जवाब न होगा। ऐसे दिन आने से पहले आप मंहगाई और बेरोजगारी के बार में सोचिए। मैं एक आम आदमी की तरह आज मीडिया के माध्यम से आप से सवाल करता हूं।
वहीं विकास सिंह ने कहा कि एक अधिवक्ता होने के नाते मैं यह भी सवाल खड़ करना चाहता हूं कि वर्तमान में सबसे दयनीय स्थिति अधिवक्ताओं की है। आएदिन कहीं न कहीं अधिवक्ताओं के ऊपर हमले हो रहे है, उनकी हत्या हो रही है और वह बुरी तरह से प्रताड़ित हो रहे है, लेकिन उनकी सुनवाई कहीं न हो रही। अधिवक्ता लंबे समय से अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट की मांग कर रहे है, लेकिन न ही देश और न ही प्रदेश की भाजपा सरकार के कान पर जूं रेंग रही है। वहीं अवैध रूप से लखनऊ में सैकड़ों अधिवक्ताओं के चैंबर को तोड़ दिया गया। यह तानाशाही नहीं है तो और क्या है? प्रदेश में अधिवक्ताओं को बैठने का स्थान नहीं है और जो है भी उसे भी सरकार की शह पर तोड़फोड़ दिया जा रहा है। वर्तमान में वाराणसी कचहरी का ही उदाहरण ले तो कचहरी परिसर के आसपास काफी जमीन है, जिसपर पूंजीपतियों का अवैध कब्जा है, लेकिन सरकार उसको कचहरी परिसर के विस्तार के लिए देने में आनाकानी कर रही है।
इसका सीधा सा मतलब है कि पूंजिपतियों के दबाव में वर्तमान भाजपा सरकार काम कर रही है। क्यों वकीलों को हटाने की साजिश रची जा रही है, जबकि कचहरी परिसर के आसपास ही इतनी जमीन है कि एक हाईटेक कचहरी का निर्माण हो सकता है। अधिवक्ता जो खुद न्याय की लड़ाई दूसरों के लिए लड़ता है, आज वह खुद अपनी लड़ाई लड़ने को मजबूर है। वहीं आएदिन सड़क पर अराजक तत्वों द्वारा आपराधिक घटनाओं का अंजाम दिया जा रहा है, वो भी सरकार में बैठे मंत्री और विधायक के बल पर और सरकार उनको संरक्षण दे रही है और गरीबों और मजलूमों पर जुल्म ढा रही और अपराध को बढ़ावा दे रही है, जबकि इस सरकार का सबसे बड़ा दावा अपराध और भ्रष्टाचार मुक्त रहने का था।
