गौप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद के बाद प्रथम आगमन; श्रीविद्यामठ में होगा चरण पादुका पूजन और पुष्पवर्षा
वाराणसी। धर्म की नगरी काशी में चैत्र नवरात्र और नव संवत्सर का उत्साह इस बार और भी विशेष होने जा रहा है। ‘गौप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद’ के सफल आयोजन के पश्चात, परमधर्माधिश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती ‘1008’ महाराज कल, यानी 18 मार्च 2026 को सायंकाल काशी पधार रहे हैं।
शंकराचार्य जी महाराज छत्तीसगढ़ से प्रयागराज होते हुए वाराणसी पहुंचेंगे, जहां सनातनी जनता और गौभक्त पुष्पवर्षा एवं जयघोष के साथ उनका भव्य स्वागत करेंगे।
श्रीविद्यामठ में होगा स्वागत और पूजन शंकराचार्य जी के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि महाराज जी के काशी आगमन पर श्रीविद्यामठ में भक्तों द्वारा उनके चरण पादुका का विधिवत पूजन किया जाएगा। इस दौरान पूरे नवरात्र पर्यंत शंकराचार्य जी के सान्निध्य और मार्गदर्शन में विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठान और विशेष पूजन संपन्न होंगे।
19 मार्च: नव संवत्सरोत्सव और पंचांग विमोचन चैत्र नवरात्र की प्रतिपदा (19 मार्च) को नव संवत्सरोत्सव के पावन अवसर पर शंकराचार्य जी ‘सनातनी पंचांग’ का विमोचन करेंगे। इसके साथ ही नवरात्र भर भगवती के विशेष पूजन सहित विविध धार्मिक व मांगलिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।
प्रातर्मंगलम् का 20वां वार्षिकोत्सव नवरात्र के प्रथम दिन एक और विशेष आकर्षण ‘प्रातर्मंगलम्’ का 20वां वार्षिकोत्सव होगा। इस अवसर पर बटुक विद्यार्थियों द्वारा नव वर्ष के प्रथम सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। बटुकगण विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देंगे। शंकराचार्य घाट पर उत्सव का विशेष माहौल रहेगा।
“शंकराचार्य जी का काशी आगमन केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि सनातनी संस्कृति और गौ-सेवा के संकल्प को नई ऊर्जा देने का महापर्व है।” — संजय पाण्डेय, मीडिया प्रभारी
