वाराणसी। परमाराध्य परमधर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के सानिध्य में आज काशी के ऐतिहासिक शंकराचार्य घाट पर शौर्य और संकल्प का अनूठा संगम देखने को मिला। अवसर था छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती का, जिसे शंकराचार्य जी ने ‘गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ के शंखनाद के रूप में मनाया।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार को गौमाता को ‘राज्यमाता’ घोषित करने और पूर्ण गोकशी बंदी के लिए दी गई 40 दिनों की समय-सीमा के अब केवल 5 दिन शेष रह गए हैं।

गंगा पूजन के साथ लिया गौरक्षा का संकल्प
शंकराचार्य जी महाराज ने सर्वप्रथम विधि-विधान से मां गंगा का पूजन किया। इसके पश्चात उन्होंने हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के चित्र पर तिलक लगातर पुष्पांजलि अर्पित की। उपस्थित जनसमूह को गौरक्षा का संकल्प दिलाते हुए उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने मात्र 12 वर्ष की आयु में एक गौहत्यारे को दंडित कर स्पष्ट कर दिया था कि सनातन धर्म में गौ, ब्राह्मण और देवालयों की रक्षा ही राजा का परम कर्तव्य है।
”भगवान राम ने ऋषि विश्वामित्र के सम्मुख और शिवाजी महाराज के पुत्र संभाजी महाराज ने ‘बुधभूषणम्’ ग्रंथ में स्पष्ट किया है कि जो क्षत्रिय गाय और मंदिर के लिए प्राण देता है, उसकी कीर्ति अनंत काल तक रहती है।” — शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
‘छद्म हिंदुओं’ को पहचानने का समय
शंकराचार्य जी ने कड़े शब्दों में कहा कि आज अपनों के बीच ही छिपे उन लोगों को पहचानने का समय आ गया है जो हिंदू होने का ढोंग करते हैं लेकिन गाय और मंदिरों को नष्ट करने के प्रयासों में सहायक हैं। उन्होंने आज से ही ऐसे तत्वों के विरुद्ध धर्मयुद्ध का आह्वान किया। इस अवसर पर कलाकारों ने शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित एक प्रभावी लघु नाटिका प्रस्तुत की, जिसमें उनके द्वारा की गई गौरक्षा के दृश्यों को जीवंत किया गया।

शंकराचार्य जी ‘करपात्र गौभक्त सम्मान’ से विभूषित
गौ-संवर्धन और संरक्षण के क्षेत्र में उनके अतुलनीय प्रयासों के लिए ‘अखिल भारतीय सारस्वत परिषद’ द्वारा पूज्य महाराज जी को ‘करपात्र गौभक्त सम्मान’ से सम्मानित किया गया। संस्था की ओर से गिरीश चंद्र तिवारी एवं प्रो. विवेकानंद तिवारी ने संयुक्त रूप से उन्हें यह सम्मान भेंट किया।
कल काशी से लखनऊ के लिए प्रस्थान: संकट मोचन में होगा बजरंग बाण का पाठ
शंकराचार्य जी के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि 11 मार्च को लखनऊ में होने वाले विशाल ‘गोप्रतिष्ठा शंखनाद’ हेतु महाराज जी कल प्रस्थान करेंगे।
- प्रस्थान: प्रातः 8:30 बजे (श्रीविद्यामठ, काशी)
- प्रथम पड़ाव: चिंतामणि गणेश मंदिर में दर्शन-पूजन।
- संकट मोचन: मंदिर में सामूहिक हनुमान चालीसा, हनुमानाष्टक एवं बजरंगबाण का पाठ कर विजय की प्रार्थना करेंगे।
- मार्ग: अधिवक्ताओं और गौभक्तों द्वारा विभिन्न स्थानों पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया जाएगा।
महाराज जी विभिन्न पड़ावों से होते हुए 11 मार्च को राजधानी लखनऊ पहुँचकर धर्मयुद्ध का अंतिम उद्घोष करेंगे।
