वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) का कृषि विज्ञान संस्थान कल यानी 7 मार्च से दो दिवसीय भव्य ‘किसान मेला एवं कृषि-उद्योग प्रदर्शनी’ की मेजबानी के लिए तैयार है। “विकसित कृषि–समर्थ भारत” की थीम पर आधारित इस आयोजन में पूर्वांचल समेत बिहार और मध्य प्रदेश के हजारों किसानों का जमावड़ा लगेगा।
प्रमुख आकर्षण और सहभागिता
मेले में आधुनिक खेती के गुर सिखाने के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां अपने स्टाल लगा रही हैं।
- पंजीकरण: अब तक पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से लगभग 800 और पड़ोसी राज्यों से 200 किसानों ने अपना पंजीकरण सुनिश्चित कराया है।
- प्रमुख संस्थान: प्रदर्शनी में ICAR-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, NSL, DCM फर्टिलाइजर, और राष्ट्रीय बीज अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र जैसे संस्थान किसानों को नवीनतम तकनीक से रूबरू कराएंगे।
इन विषयों पर होगा विशेष मंथन
कार्यशाला के दौरान वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रशिक्षित किया जाएगा:
- प्राकृतिक एवं संरक्षण खेती: रसायनों से मुक्ति और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के तरीके।
- मिलेट उत्पादन: श्री अन्न (बाजरा) की खेती और उसके लाभ।
- उद्यमिता: पशुपालन, औषधीय खेती और कृषि आधारित स्टार्टअप के जरिए आय बढ़ाने के साधन।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मंत्री कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान, उत्तर प्रदेश सरकार सूर्य प्रताप साही एवं कार्यक्रम के अध्यक्षता काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0. अजित कुमार चतुर्वेदी, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा किया जायेगा। दूसरे दिन प्रतिभागियों को कृषि अनुसंधान फार्म, आई.आर.आर.आई. (दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र) तथा आई.सी.ए.आर.–भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी का भ्रमण कराया जाएगा।
संस्थान के निदेशक प्रो. यू. पी. सिंह ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि करना और ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करना है। दूसरे दिन किसानों को सीधे अनुसंधान फार्मों पर ले जाया जाएगा ताकि वे तकनीक को करीब से देख सकें।
