वाराणसी, 5 नवंबर 2026। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में छात्रसंघ बहाली और विद्यार्थियों की विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर छात्रसंघ भवन पर पिछले दस दिनों से जारी अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन गुरुवार को समाप्त हो गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी के साथ हुई सकारात्मक वार्ता और उनके आश्वासन के बाद छात्र प्रतिनिधिमंडल ने फिलहाल धरना समाप्त करने का निर्णय लिया। हालांकि, छात्रों ने स्पष्ट किया कि यदि छात्रसंघ बहाली को लेकर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो इससे भी बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
दरअसल, छात्रसंघ बहाली समेत विद्यार्थियों की विभिन्न समस्याओं को लेकर छात्र पिछले दस दिनों से छात्रसंघ भवन पर धरना दे रहे थे। आंदोलन के दसवें दिन कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने मामले का संज्ञान लेते हुए छात्र प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए आमंत्रित किया।
छात्रों ने उठाया लोकतांत्रिक अधिकारों और प्रतिनिधित्व का मुद्दा
कुलपति के साथ हुई वार्ता में छात्रों ने विश्वविद्यालय में पिछले लगभग तीन दशकों से छात्रसंघ चुनाव नहीं होने के कारण विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व में आई कमी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि छात्रसंघ महज चुनाव कराने की व्यवस्था नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की आवाज, अधिकारों और लोकतांत्रिक भागीदारी का महत्वपूर्ण मंच है। इसके अभाव में विद्यार्थियों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से प्रशासन तक पहुंचाने और उनके समाधान की प्रक्रिया प्रभावित होती है।
छात्रों ने छात्रहित से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने तथा विद्यार्थियों की समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण की मांग भी रखी।
कमेटी की रिपोर्ट के बाद चुनाव प्रक्रिया पर आगे बढ़ेगा विश्वविद्यालय प्रशासन
कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने छात्र प्रतिनिधिमंडल की सभी बातों को गंभीरता और धैर्यपूर्वक सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन सार्थक प्रयास करेगा। छात्रसंघ चुनाव के संबंध में उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा गठित कमेटी शीघ्र ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद छात्रसंघ अथवा छात्र परिषद के चुनाव की आगामी प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
कुलपति ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय के सभी विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान करना प्रशासन का नैतिक दायित्व है। उन्होंने विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को बेहतर बनाने में सहयोग करने की अपील की।
छात्र नेताओं ने रखी अपनी बात
वार्ता के दौरान छात्र नेता एवं पूर्व सदस्य, छात्र परिषद, BHU अभिषेक कुमार सिंह ने छात्रसंघ की गौरवशाली एवं समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रसंघ विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकारों और शैक्षणिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिलना चाहिए, ताकि वे अपनी समस्याओं और मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष रख सकें।
वहीं, धरनारत छात्र नेता शिवांश सिंह ने कहा कि छात्रसंघ बहाली की लड़ाई विद्यार्थियों के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई है। कुलपति महोदय के आश्वासन और उनकी बातों पर विश्वास जताते हुए फिलहाल दस दिनों से जारी अनिश्चितकालीन धरने को समाप्त किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जल्द ही छात्रसंघ बहाली को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है, तो छात्र इससे भी बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की प्राथमिकता विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक व्यवस्था की पुनर्बहाली सुनिश्चित करना है।

छात्र नेता सत्यम सिंह ने भी कुलपति के समक्ष लोकतांत्रिक छात्र प्रतिनिधित्व की आवश्यकता को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शामिल है और शैक्षणिक एवं संस्थागत स्तर पर इसकी विशिष्ट पहचान है। ऐसे में यहां भी लोकतांत्रिक छात्र प्रतिनिधित्व की व्यवस्था बहाल होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश के अन्य विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव होते हैं, तो BHU के विद्यार्थियों को इस लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित क्यों रखा जा रहा है?

इसके अतिरिक्त छात्र निर्मित ने अपनी शैक्षणिक समस्याओं को कुलपति के समक्ष रखते हुए उनके शीघ्र समाधान का आग्रह किया। कुलपति ने इन समस्याओं को भी संज्ञान में लेते हुए उनके निस्तारण का भरोसा दिलाया और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

सैकड़ों छात्र रहे मौजूद, आंदोलन जारी रखने का संकल्प
वार्ता के दौरान कुलपति कार्यालय के बाहर सैकड़ों की संख्या में छात्र मौजूद रहे। इस दौरान अमन, आदित्य, निर्मित, विवर्त, करण, योगेश योगी, शौर्य, शिवम, अमृतांशु, अमित, आशीष, देव सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
छात्र प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि दस दिनों से जारी धरने को समाप्त करने का अर्थ संघर्ष को समाप्त करना नहीं है। छात्रसंघ बहाली, लोकतांत्रिक अधिकारों और विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर संघर्ष जारी रहेगा।
अब विश्वविद्यालय प्रशासन की गठित कमेटी की रिपोर्ट और उसके बाद होने वाले निर्णय पर सभी की निगाहें टिकी हैं। छात्रों को उम्मीद है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द ही छात्रसंघ बहाली की दिशा में ठोस पहल करेगा।
