वाराणसी। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने अपनी कमर कस ली है। ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ के तहत जिले में 100 दिवसीय विशेष कार्यक्रम को युद्ध स्तर पर संचालित किया जा रहा है। नोएडा में 24 मार्च 2024 (विश्व टीबी दिवस) को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा द्वारा शुरू किए गए इस अभियान को बनारस के शहरी और ग्रामीण इलाकों में प्रभावी रूप से लागू करने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने सूक्ष्म कार्ययोजना (माइक्रो प्लान) तैयार की है।
हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों से हो रही सघन जांच
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. पीयूष राय ने बताया कि जिले के 331 संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है। इन क्षेत्रों में अत्याधुनिक ‘हैंडहेल्ड एक्स-रे’ मशीनों के माध्यम से विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं।
- अब तक की प्रगति: अभियान की शुरुआत से अब तक 14 बड़े कैंप आयोजित किए जा चुके हैं।
- स्क्रीनिंग: कुल 1,295 व्यक्तियों की जांच की गई, जिनमें से 281 के एक्स-रे असामान्य मिले।
- पुष्टि और उपचार: संदिग्ध 120 मरीजों के बलगम के नमूने ‘नाट’ (NAAT) मशीन से जांचे गए, जिनमें 16 नए मरीज मिलने पर तत्काल उनका उपचार शुरू कर दिया गया है।
“कैंपों में केवल टीबी ही नहीं, बल्कि मरीजों के ब्लड प्रेशर, शुगर और हीमोग्लोबिन की भी जांच की जा रही है। अगले सप्ताह से ग्रामीण अंचलों में भी इन कैंपों का विस्तार किया जाएगा।” — डॉ. पीयूष राय, जिला क्षय रोग अधिकारी
जागरूकता की मशाल: 125 स्कूलों तक पहुंची टीम
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. राजेश प्रसाद के अनुसार, बीमारी के खात्मे के लिए सामाजिक जागरूकता अनिवार्य है। पीरामल फाउंडेशन के सहयोग से जिले के 125 विद्यालयों में जागरूकता सत्र आयोजित किए गए। इस पहल के माध्यम से लगभग 12,900 छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को टीबी के लक्षणों और बचाव के प्रति संवेदनशील बनाया गया है।
उपलब्धि: 387 ग्राम पंचायतें हुईं ‘टीबी मुक्त’
वाराणसी ने इस दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2025 में जनपद की 387 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है। वहीं, 1 जनवरी 2026 से अब तक लगभग 1.65 लाख लोगों की स्क्रीनिंग कर संदिग्ध मरीजों को उचित स्वास्थ्य केंद्रों पर भेजा गया है।
डिजिटल कवच: ‘खुशी’ चैटबॉट बनेगा मरीजों का सारथी
मरीजों की सुविधा के लिए सेंट्रल टीबी डिवीजन द्वारा जारी “टीबी मुक्त भारत” मोबाइल ऐप का व्यापक प्रचार किया जा रहा है।
- निक्षय आईडी से लॉगिन: नए और पुराने मरीजों को ऐप डाउनलोड कराकर उनकी निक्षय आईडी से लिंक किया जा रहा है।
- खुशी चैटबॉट: इस ऐप में मौजूद ‘खुशी’ चैटबॉट मरीजों को दवा खाने का समय याद दिलाने के साथ-साथ उनकी छोटी-मोटी समस्याओं का तुरंत समाधान कर रही है।
स्वास्थ्य विभाग की इस सक्रियता से उम्मीद जगी है कि वाराणसी जल्द ही पूरी तरह टीबी मुक्त होने का गौरव प्राप्त करेगा।
