वाराणसी। 50 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की जमीन को कथित रूप से हड़पने के मामले में आरोपित वरुणापति उपाध्याय को अदालत से बड़ी राहत मिली है। अपर जिला जज (षष्ठम) आलोक कुमार की अदालत ने दरेखू, रोहनिया निवासी वरुणापति उपाध्याय की अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली। अदालत ने एक लाख रुपये के जमानतदार और बंधपत्र प्रस्तुत करने पर उन्हें अग्रिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विकास सिंह ने पैरवी की।
क्या है पूरा मामला?
अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता प्रमिला मिश्रा ने रोहनिया थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उनके पति करीब 65 वर्ष के हैं और लंबे समय से किडनी की बीमारी से पीड़ित हैं तथा नियमित डायलिसिस कराते हैं। आरोप है कि उनकी बीमारी और पारिवारिक परिस्थितियों का लाभ उठाकर कुछ लोगों ने उनकी संपत्ति और आर्थिक संसाधनों पर कब्जा करने की योजना बनाई।
प्राथमिकी के अनुसार, आरोपित विशाल मिश्रा, रवि उपाध्याय, वरुणापति उपाध्याय, नितेश राय, सुरेश कुमार सिंह, अजय तिवारी, प्रवीण सिंह, प्रशांत सिंह, अनिल कुमार और सत्यांशु सिंह पर आपस में मिलीभगत कर 7 अप्रैल 2026 को करीब 70 बिस्वा भूमि का बैनामा अपने पक्ष में कराने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में जमीन की कीमत 50 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।
बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?
अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत के समक्ष दलील दी कि किसी व्यक्ति पर लगाए गए आरोप मात्र से अपराध सिद्ध नहीं हो जाता। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी में आरोपित वरुणापति उपाध्याय के नाम जमीन या संबंधित दस्तावेज अपने नाम करवाने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।
अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध तथ्यों और दोनों पक्षों की दलीलों का अवलोकन करने के बाद वरुणापति उपाध्याय की अग्रिम जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।
सुरेश सिंह का नाम भी रहा सुर्खियों में
इस पूरे प्रकरण को लेकर भाजपा जिला उपाध्यक्ष सुरेश कुमार सिंह का नाम भी मीडिया की सुर्खियों में रहा। अभियोजन कथानक में सुरेश कुमार सिंह का नाम अन्य व्यक्तियों के साथ उल्लिखित है।
हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायालय की ओर से होना बाकी है। अग्रिम जमानत मिलना किसी आरोपित के दोषमुक्त होने के समान नहीं है।

