April 12, 2021

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वाराणसी : 4.56 लाख बच्चों को पिलाई जाएगी विटामिन A की खुराक, 13 अगस्त से प्रारंभ होगा ‘विटामिन A सम्पूरण’ कार्यक्रम

वाराणसी : जिलाधिकारी एवं जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष कौशल राज शर्मा ने कहा कि जनपद में नौनिहालों को कुपोषण से मुक्त रखने के लिए ‘विटामिन ए सम्पूरण’ कार्यक्रम बाल स्वास्थ्य पोषण माह की शुरुआत 13 अगस्त से ग्रामीण एवं शहरी स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी व यूएचएसएनडी) सत्रों में की जा रही है।

आगामी 10 सितंबर 2020 तक चलने वाले इस विशेष अभियान की शुरुआत जिले में इस अभियान में 9 माह से 5 वर्ष तक के 4.56 लाख को विटामिन ए की खुराक पिलायी जायेगी। राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य एवं आईसीडीएस विभाग के सहयोग से संचालित यह कार्यक्रम टीकाकरण का एक अभिन्न अंग है जो प्रतिवर्ष दो चरणों में माह जून एवं दिसंबर में वीएचएसएनडी व यूएचएसएनडी सत्रों पर आयोजित किया जाता है।

कोविड-19 के संक्रमण की स्थिति में अभियान के पहले चरण का आयोजन संभव नहीं हो सका। नौ माह से पाँच वर्ष तक के बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने हेतु उन्हें विटामिन-ए से आच्छादित करना बेहद आवश्यक है। जनपद में 13 अगस्त से 10 सितंबर की अवधि में दिन बुधवार एवं शनिवार को आयोजित होने वाले ग्रामीण एवं शहरी स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस सत्रों के माध्यम से विटामिन ए का आच्छादन किया जाएगा।

उन्होने स्वास्थ्य विभाग एवं आईसीडीएस को सूचित किया कि बनाए गए माइक्रोप्लान का भली भांति परीक्षण कर लें तथा यह सुनिश्चित कर लें जनपद में 9 माह से 5 वर्ष तक का कोई भी बच्चा विटामिन ए की खुराक से छूटने न पाये। प्रभारी चिकित्साधिकारी एवं सीडीपीओ संयुक्त रूप से अभियान का संचालन सुनिश्चित करें तथा इसमें ग्राम प्रधान, पार्षद, सिविल डिफेंस के वार्डन, नेहरू युवा केंद्र के कार्यकर्ताओं एवं अन्य सहयोगी व्यक्तियों एवं संस्थाओं की भूमिका सुनिश्चित कराएं।

जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि कोविड-19 संक्रमण से बचाव एवं नियमों को ध्यान में रखते हुये अभियान के तहत सभी गतिविधियों का आयोजन किया जाए। सत्रों के आयोजन के समय सोशल डिस्टेन्सिंग, मास्क पहनने, साबुन से हाथ धोने एवं संक्रमण रोकथाम संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए। सत्रों पर हाथ धोने के लिए एक कॉर्नर अवश्य बनाया जाए, जहां पर एक बाल्टी, स्वच्छ पानी, एक मग और एक साबुन की व्यवस्था की सुनिश्चित की जाए।

सत्र के प्रारम्भ होने से पहले स्वच्छता के मानक प्रोटोकॉल के अनुसार सभी फ्रंट लाइन वर्कर कम से कम 20 सेकेंड तक साबुन एवं पानी से अपने हाथों को अवश्य धोएँ और समय समय पर सेनिटाइज़र से हाथ साफ करना सुनिश्चित करें। आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता यह भी सुनिश्चित करें कि प्रत्येक स्लॉट में बुलाये गए लाभार्थी सोशल डिस्टेन्सिंग (दो लाभार्थियों के मध्य कम से कम 1 मीटर की दूरी) का अनुसरण करें।

लाभार्थियों को मोबलाइज़ करने में आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इस बात पर अवश्य ज़ोर दें कि प्रत्येक लाभार्थी के साथ एक से अधिक देखभालकर्ता सत्र पर न आएं एवं यदि परिवार में किसी सदस्य को बुखार, खांसी या सांस लेने में तकलीफ के लक्षण हैं अन्यथा अन्य किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित है तो वह सत्रह पर बिल्कुल ही न आएं और ऐसे परिवार के संबंध में फ्रंट लाइन वर्कर संबन्धित क्षेत्र के अधीक्षक/प्रभारी चिकित्साधिकारी को तत्काल सूचित करें।

इस संदर्भ में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ वीबी सिंह ने बताया कि माह भर चलने वाले इस विशेष अभियान में बच्चों को विटामिन ए की खुराक पिलाने के साथ ही उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक टीके भी लगाए जायेंगे। अभियान के दौरान नये कुपोषित बच्चों को चिन्हित किया जायेगा। ग्रामीण महिलाओं को अभियान से जुड़ी महिला कार्यकर्ता दैनिक जीवन में आयोडीन के प्रयोग की उपयोगिता से परिचित करायेंगीं जिससे वह रसोई में आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग शुरू कर सकें। ऐसा करके देश का भविष्य कहे जाने वाले बच्चों में आयोडीन की कमी से होने बाले विभिन्न रोगों से सुरक्षित किया जायेगा।

उन्होने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्देश पर देश से कुपोषण को मार भगाने के लिए पूरे एक माह चलने वाले इस विशेष अभियान के लिए एएनएम, आशा तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा सप्ताह में दो बार वीएचएसएनडी और यूएचएसएनडी सत्रों में बुधवार और शनिवार को विटामिन ए की खुराक पिलाने का काम किया जायेगा।

वही अभियान के नोडल अधिकारी और जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ वीएस राय ने बताया कि इस अभियन में खुराक पिलाने के साथ ही इस आयु वर्ग के बच्चों को जीवन रक्षक टीके भी दिये जायेंगे। अभियान में लगभग 4.56 लाख बच्चों को विटामिन ए की खुराक पिलाकर उन्हें स्वस्थ जीवन की मुख्य धारा से जोड़ा जायेगा। उन्होने बताया कि जनपद में 09 माह से 12 माह तक के बच्चों की संख्या 26,682 है जबकि 01 वर्ष से 02 वर्ष के बीच के बच्चों की संख्या 1.14 लाख है। वहीं 02 साल से 05 वर्ष तक के बच्चों की संख्या 3.15 लाख है।

डॉ वीएस राय ने बताया कि विटामिन ‘ए’ की कमी से बच्चों में नजर का कमजोर होना, रात्रि के समय कम दिखाई देना, अंधेपन का शिकार हो जाना, रूखी आँख, रूखी त्वचा और त्वचा से संबन्धित समस्या हो सकती है। इसकी कमी से बचपन में होने वाली दस्त जैसी आम बीमारियाँ भी जानलेवा हो सकती हैं। इन सभी कमियों को पूरा करने के लिए बच्चों को विटामिन ए की खुराक देना बेहद आवश्यक है।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है –

• 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों में विटामिन ए को बढ़ावा देना,
• सभी कुपोषित बच्चों का पुनः वजन, प्रबंधन व संदर्भन करना,
• नियमित टीकाकरण के दौरान लक्षित बच्चों के साथ आंशिक रूप से प्रतिरक्षित बच्चों को प्रतिरक्षण करते हुये शत-प्रतिशत टीकाकरण करना।
• बाल्य रोगों की रोकथाम करते हुये स्तनपान व ऊपरी आहार, को बढ़ावा देते हुये कुपोषण से बचाव करना,
• आयोडीन युक्त नमक के प्रयोग को बढ़ावा देना।

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