लखनऊ। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राजधानी लखनऊ में ‘गो-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान’ का शंखनाद किया। इस दौरान उन्होंने न केवल गो-भक्ति का संदेश दिया, बल्कि राजनीतिक दलों और प्रशासन पर भी जमकर शब्द-बाण छोड़े। कार्यक्रम में उम्मीद से कम भीड़ जुटने पर शंकराचार्य ने चुटीले अंदाज में कहा, “यह शराब की दुकान नहीं है, बल्कि शुद्ध गाय की सभा है। अगर यहाँ बहुत भीड़ होती, तो समझिए कि यह शराब की दुकान होती। कम भीड़ इस बात का प्रमाण है कि यहाँ केवल सच्चे गो-भक्त ही आए हैं।”
राजनीति पर कटाक्ष: ‘भाजपा अब भागपा बन गई है’
अक्सर समाजवादी पार्टी (सपा) के समर्थक बताए जाने के आरोपों पर सफाई देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि उनके कार्यक्रमों में सबसे ज्यादा संख्या भाजपा से जुड़े लोगों की ही होती है। सत्ताधारी दल पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी अब “भागपा” बन गई है। उन्होंने अभियान से जुड़ने वाले लोगों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि आज जो लोग अपना नाम दर्ज कराएंगे, वे इस राष्ट्रव्यापी अभियान के ‘फाउंडर मेंबर’ (संस्थापक सदस्य) कहलाएंगे।
प्रशासन की 26 शर्तों पर उठाए सवाल
शंकराचार्य ने लखनऊ प्रशासन द्वारा कार्यक्रम की अनुमति के लिए लगाई गई 26 शर्तों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “प्रशासन ने शर्त रखी है कि किसी का नाम लेकर आरोप न लगाएं और भड़काऊ बयान न दें। आखिर प्रशासन किसका नाम लेने से रोक रहा है? ऐसी पाबंदियां लोगों के मन में संदेह पैदा करती हैं।”
महिला समर्थक और पुलिस के बीच तीखी झड़प
कार्यक्रम के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई जब शंकराचार्य से मिलने जा रही एक महिला अनुयायी को पुलिस ने रोक दिया। इससे नाराज होकर महिला की महिला पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और तीखी बहस हुई। हालांकि, मौके पर मौजूद अन्य पुलिस अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को बिगड़ने से संभाला।
मुख्य बिंदु:
- गो-भक्ति: अभियान का लक्ष्य गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना है।
- फाउंडर मेंबर्स: सभा में मौजूद समर्थकों को अभियान के बुनियादी सदस्य के रूप में पंजीकृत किया गया।
- प्रशासनिक घेराबंदी: 26 शर्तों के साथ मिली अनुमति को शंकराचार्य ने अभिव्यक्ति पर अंकुश बताया।
