वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के स्वतंत्रता भवन में मंगलवार की शाम संस्कृत की मधुर गूँज और सजीव अभिनय के नाम रही। संस्कृत विभाग (कला संकाय), भारत अध्ययन केंद्र तथा उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में महाकवि भास रचित कालजयी नाटक ‘मध्यमव्यायोग’ का सफल मंचन किया गया।
विद्यार्थियों के संस्कृत संवादों ने जीता दिल
नाटक की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि संस्कृत विभाग के छात्र-छात्राओं ने पूरी प्रस्तुति मूल संस्कृत भाषा में दी। महाभारत की पृष्ठभूमि पर आधारित इस एकांकी नाटक में वीरता, कर्तव्यबोध और पारिवारिक संवेदनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। विशेष रूप से भीम और उनके पुत्र घटोत्कच के बीच हुए अप्रत्याशित मिलन और संवादों ने दर्शकों को आदिपर्व के उन मार्मिक प्रसंगों की याद दिला दी।

सांस्कृतिक चेतना का माध्यम है रंगमंच: कुलपति
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने अपना उद्बोधन भी संस्कृत भाषा में ही दिया। उन्होंने सफल आयोजन की बधाई देते हुए कहा:
”रंगमंच समाज में संवेदनशीलता और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। ऐसे आयोजन भारतीय परंपरा और सृजनात्मक अभिव्यक्ति के संवर्धन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।”
कुशल निर्देशन और टीम वर्क
नाटक का निर्देशन संस्कृत विभाग की डॉ. शिल्पा सिंह द्वारा किया गया, जबकि पात्रों के सजीव अभिनय को निखारने का श्रेय प्रशिक्षिका डॉ. दिव्या श्रीवास्तव को गया। मंचन के दौरान भीम, घटोत्कच और ब्राह्मण परिवार की भूमिकाओं में छात्रों के समर्पण और स्पष्ट उच्चारण की सभी ने सराहना की।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर भारत अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. शरदिन्दु कुमार तिवारी, संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी और कला संकाय के पूर्व प्रमुख प्रो. किशोर मिश्र सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, छात्र और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
अन्य तस्वीरें






