कछार : केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह कल, शुक्रवार (20 फरवरी) को असम के कछार जिले के सीमावर्ती गांव नाथनपुर से ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम–II’ (VVP–II) का ऐतिहासिक आगाज़ करेंगे। ‘विकसित भारत @2047’ के विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में यह कार्यक्रम सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास के बीच एक मजबूत कड़ी साबित होगा।
पलायन रुकेगा, सुरक्षा बढ़ेगी VVP-II को केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर योजना के रूप में नहीं, बल्कि सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य सीमावर्ती गांवों में आधुनिक सुविधाएं और रोजगार के अवसर पैदा करना है ताकि वहां से होने वाले पलायन को रोका जा सके। गृह मंत्रालय का मानना है कि जब सीमावर्ती गांव ‘वाइब्रेंट’ (जीवंत) होंगे, तो वहां के नागरिक देश की ‘आंख और कान’ बनकर सीमा पार अपराधों को रोकने और सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने में सेना व अर्धसैनिक बलों की मदद करेंगे।
सैचुरेशन मॉडल पर आधारित विकास इस योजना के लिए केंद्र सरकार ने ₹6,839 करोड़ का प्रावधान किया है। इसे ‘सैचुरेशन-बेस्ड’ (पूर्णता आधारित) और ‘कन्वर्जेंस-ड्रिवन’ अप्रोच के साथ लागू किया जाएगा। इसका अर्थ है कि गांव के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाया जाएगा। सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सेवाओं के साथ-साथ डिजिटल कनेक्टिविटी और पर्यटन को बढ़ावा देना भी इस मिशन का हिस्सा है।
15 राज्यों और 2 UTs में होगा विस्तार वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का दूसरा चरण बेहद व्यापक है। इसे देश के 15 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों के सीमावर्ती क्षेत्रों में लागू किया जाएगा। वित्त वर्ष 2028-29 तक चलने वाले इस कार्यक्रम के जरिए सरकार का संकल्प एक ऐसी ‘बॉर्डर कम्युनिटी’ तैयार करना है जो न केवल समृद्ध हो, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करे।
