December 5, 2020

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भारत मे 10 हजार रुपये का नोट क्यो छापा जाता था ? इस लिए करना पड़ा था बन्द…

भारत में 10000 रुपए के नोट के साथ 5000 रुपए का भी नोट भी छापा जाता था। हमारे देश को आजाद होने के बाद और पहले भी ये नोट प्रिंट किया जाता था। उस दौरान 10 हजार और 5 हजार के दोनों नोट भारत में बहुत ही प्रचलित था। वही 10 हजार का नोट एक जनवरी 1938 को नासिक में छापा गया था। इसके समय-समय पर नए-नए नोटों के अलग अलग विविधता के नोट छापने लगे थे। ये नोट रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा छापा जाता था।

बड़े लेनदेन के लिए बनाई गई थी 10 हजार की नोट

इन नोटों का मुख्य उद्देश्य ये था कि बड़ी लेनदेन को आसान और सुरक्षित बनाना था। इन नोटों की मुश्किल काले धन को लेकर हुई थी। हम सब जानते है कि 10000 रुपए का नोट बहुत बड़ी करेंसी का नोट होता है और ये नोट बड़ी आसानी से काले धन में बदला जा सकता है।

काले धन को रोकने के लिए सरकार ने वापस लेने का किया फैसला

काफी कम मात्रा में ये नोट बहुत बड़ी रकम हो जाती थी। इसी कारण से 16 जनवरी 1978 को काले धन को रोकने के लिए सरकार ने इन 10000, 5000, 1000 नोटों को वापस लेने का फैसला लिया था। हालाकि, सरकार के फिर 1000 के नोटों को बाज़ार के फिर से लॉन्च कर दिया।

1938 में छापा गया था 10 हजार रुपए का नोट

सन 1938 में पहली बार रिजर्व बैंक ने 10,000 रुपए का नोट भारत में छापा गया था। रिजर्व बैंक ने जनवरी 1938 में पहली पेपर करंसी छापी थी, जो 5 रुपए नोट की थी। इसी साल 10 रुपए, 100 रुपए, 1,000 रुपए और 10,000 रुपए के नोट भी छापे गए थे। हालांकि, 1946 में 1,000 और 10 हजार के नोट बंद कर दिए गए। 1954 में एक बार फिर से 1,000 और 10,000 रुपए के नोट छापे गए। साथ ही 5,000 रुपए के नोट की भी छपाई की गई। लेकिन, 1978 में इन्हें पूरी तरह से बंद कर दिया गया। 

पहले बैंक छापते थे नोट

पेपर करंसी छापने की शुरुआत 18वीं शताब्दी में हुई। सबसे पहले इसे बैंक ऑफ बंगाल, बैंक ऑफ बॉम्बे और बैंक ऑफ मद्रास जैसे बैंकों ने पेपर करंसी छापी थी। पेपर करंसी एक्ट 1861 के बाद करंसी छापने का पूरा अधिकार भारत सरकार को दे दिया गया। 1935 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना तक भारत सरकार करंसी छापती रही, जिसके बाद रिजर्व बैंक ने यह जिम्मेदारी अपने हाथों में ले ली।