वाराणसी : घाटवॉक की दूसरी वर्षगांठ पर मां गंगा के तट पर अद्भुत समागम

वाराणसी : काशी के लोगों के लिए रविवार का दिन यादगार बन गया। मां गंगा, गंगा के घाट और गंगा प्रेमी काशीवासियों का घाट वॉक। गोस्वामी तुलसी दास की कर्म स्थली तुलसीघाट से रैदास स्थली राजघाट तक की पदयात्रा, सुर-संगीत का लुत्फ तो साहित्य और समाज सेवियों की जुटान सब कुछ तो था। लोगों ने भगवान भाष्कर की रश्मियों का भरपूर आनंद उठाया और घाट वॉक की दूसरी सालगिरह को यादगार बना दिया।

घाट वॉक की दूसरी वर्षगांठ पर अर्ध चंद्राकार काशी के 84 घाटों पर आध्यात्मिकता, सामाजिकता और संस्कृतिक अनोखे मिलन के साथ धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान घाट पर जूटे लोग हर-हर महादेव के जयघोष के साथ अपना घाट वाक पूरा किया। राजघाट पर आयोजित वृद्धजन सम्मान समारोह में पद्मश्री राजेश्वर आचार्य ने कहा कि यह घाट वॉक केवल स्वास्थ्य ही ठीक नहीं रखता बल्कि सामाजिकता से भी जोड़ता है। काशी तो पहले से ही फक्कड़ी मिजाज वाली है, उसे जानना हो तो गलियों और घाटों पर आना होगा इसलिए घाट वॉक अर्थ, धर्म, मोक्ष और काम की पहचान कराती है।


बीएचयू के सामाज शास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो अरविन्द जोशी ने कहा कि वृद्ध और बच्चों को एक तरह से देखा जाता है मगर आज के दौर में बच्चों को अपने अभिभावक बोझ बनने लगे हैं। ऐसे में अभिभावकों को वृद्धाश्रम का सहारा लेना पड़ रहा है। इस दौरान सुधीर त्रिपाठी और रमागुरु का भी सम्मान किया गया।

पंचगंगा घाट पर आयोजित कार्यक्रम पूरे काशी घाट वॉक कार्यक्रम का आकर्षण रहा। चिली के कलाकार मिस्टर मोआ और मिस्टर टोमैसो ने गिटार और रजत बांसुरी पर जुगलबंदी की प्रस्तुति देकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रो. अरविन्द जोशी व भोजपुरी अध्ययन केंद्र बीएचयू के समन्यवक प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ला ने विभिन्न क्षेत्रों में समाजसेवा कर रहे युवा समाजसेवियों का सम्मान किया। सम्मानित होने वालों में होप टीम से दिव्यांशु उपाध्याय, लवारिशों का फरिश्ता अमन कबीर और वाराणसी ब्लड बैंक संस्था के साकेत चौबे शामिल रहे। मां दुर्गोत्सव सेवा समिति के गोविन्द सिंह व संदीप सैनी ने सबका स्वागत किया।


इससे पूर्व बबुआ पांडेय घाट पर घाट वॉक द्वारा महिलाओं का सम्मान किया गया। सम्मानित होने वालों में अंतर्राष्ट्रीय एथलीट नीलू मिश्रा, विद्यापीठ के चित्रकला विभाग की प्रोफेसर रही मंजुला चतुर्वेदी, संगीत विभाग के नृत्यकला मंच की प्रो. विधि नागर, अभ्युदय संस्था की ड़ॉ. शारदा सिंह और तनु शुक्ला का सम्मान किया गया। इस दौरान नीलू मिश्रा ने कहा कि महिलाओं को भी रोजमर्रा के कार्यक्रम में टहलान शामिल करना चाहिए। इससे न केवल स्वास्थ्य ठीक रहेगा बल्कि हर परिवार के पॉकेट पर बोझ बन रहे चिकित्सकीय खर्च से भी बच सकते है।

कार्यक्रम की शुरुआत पं. महेंद्र प्रसन्न के शहनाईवादन से हुई। उद्घाटन समारोह में प्रो श्रीप्रकाश शुक्ल की अध्यक्षता में घाट व गंगा से जुड़ी कविताओं का पाठ हुआ जिसमें वरिष्ठ कवि इंदीवर पांडेय और युवा कवयित्री प्रतिभाश्री ने कविताएं पढ़ीं। उद्घाटन के अवसर पर अतिथियों का स्वागत और विषय स्थापना करते हुए काशी घाटवाक के संस्थापक प्रो. विजयनाथ मिश्र ने कहा कि घाटवॉक भारत का डीएनए है। यहां गति के साथ हलचल है। यहां कोई विशिष्ट नही है।जीवन को सम्पूर्ण वैविध्यता में समझने की कोशिश है।

समारोह के अध्यक्ष प्रो श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि घाटवाक तन की नहीं,मन की यात्रा है। यहां पद धारक नहीं पग धारक आते हैं। यहां सूचना से अधिक संस्कार और शिक्षा से अधिक संवाद पर जोर दिया जाता है। काशी घाटवॉक विश्वविद्यालय के औचित्य पर बात करते हुए प्रो शुक्ल ने कहा कि यह जीवन को विविधता में समझने का केंद्र है जहां सामूहिक चेतना को विकसित करने व सांस्कृतिक विविधता को देखने का अवसर मिलता है। यह पर्यटन नहीं प्रेम का स्थान है जिसका हिस्सा होकर लोग उदात्त होते हैं। इस दौरान सांड बनारसी ने कहा कि जहा कोई नहीं मिलता वहा काशी का प्रतिनिधित्व करने के लिए हम हमेशा तैयार है।


इस दौरान ड़ॉ. अनिल गुप्ता, ड़ॉ. अनूप मिश्रा, कविता गोड़, आकांक्षा श्रीवास्तव, शैलेश तिवारी, अभय शंकर तिवारी, तुलसीकान्त झा, शिव विश्वकर्मा, विशाल दीक्षित, अंजनि मिश्रा, अविनाश पांडेय, सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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