वाराणसी : समाजवाद के रुझान के साथ साहित्यकारों में यथार्थवाद का भाव दिखलाई पड़ने लगा

वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय(बीएचयू) के हिंदी अनुभाग, महिला महाविद्यालय के द्वारा ‘आधुनिक हिंदी साहित्य’ पर छः दिवसीय हिंदी कार्यशाला के पांचवें दिन आज हिंदी विभाग के आचार्य प्रोफेसर अवधेश प्रधान का व्याख्यान ‘छायावादोत्तर हिंदी काव्य’ पर हुआ।

इस कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि समाजवाद के रुझान के साथ साहित्यकारों में यथार्थवाद का भाव दिखलाई पड़ने लगा। लघुता के प्रति साहित्यिक दृष्टि ही यथार्थवाद है । केदारनाथ अग्रवाल की सहज भाषा ही उनकी विशेषता है। साथ ही बताया कि नागार्जुन व्यंग्य के अद्वितीय कवि हैं। वही इसी दौरान आए हुए अतिथियों का स्वागत और विषय प्रवर्तन करते हुए हिंदी विभाग की  आचार्य प्रो. सुमन जैन ने कहा कि छायावादोत्तर काव्य की जमीन बहुत उर्वर होने के साथ ही साथ संघर्षरत है। इस काल में प्रेम का पुट भी अपने नवीन संदर्भों में आता है।

निराला की कविताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि निराला कविताएं प्रयोगवाद की एलबम हैं। छायावादोत्तर कविता के अधिकांश कवि लोकधर्मी हैं। इस कार्यक्रम का संचालन स्नातक तृतीय वर्ष की छात्रा रोशनी ने तथा धन्यवाद ज्ञापन हिंदी अनुभाग के सहायक आचार्य डा. परिमल प्रधान ने किया। उक्त अवसर पर हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार कृष्ण बलदेव वैद को श्रद्धांजलि भी प्रदान की गई। इस अवसर पर भारी संख्या में शिक्षकों और छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही।

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