वाराणसी : महिला महाविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय(बीएचयू) स्थित महिला महाविद्यालय के काॅन्फ्रेन्स हाॅल में  ‘‘गाँधी का सामाजिक न्याय और विश्व शान्ति विषयक दृष्टिकोण‘‘ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ। समापन के मुख्य अतिथि प्रो0 राकेश मिश्र प्रख्यात गाँधीवादी थे तथा विशिष्ट अतिथि दर्शन एवं धर्म विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रो0 देवब्रत चौबे थे।

इस दौरान संगोष्ठी में प्रो0 राकेश मिश्र कहा की गाँधी जी के आदर्शों को जीवन में उतारने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गाँधीजी ने सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ी तथा वर्तमान में झूठ, फरेब तथा मतलब की दुनिया में गाँधीजी की प्रासंगिकता तब होगी जब गाँधी दर्शन सिर्फ विचारों में नहीं वरन् आचरण में हो। विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए प्रो0 देवब्रत चैबे ने कहा कि गाँधी मानव व प्रकृति दोनों को सहचर मानते थे।

गाँधीजी का मानना था कि भोग की लालसा हिंसा से प्रारम्भ होती है अतः भोग पर नियंत्रण से ही समाज में उपजी समस्याओं को दूर किया जा सकता है। गाँधी एक अहिंसक समाज की स्थापना करना चाहते थे। कार्यक्रम में स्वागत प्रो0 अर्चना सिंह, अध्यक्षता प्रो0 रीता सिंह, संचालन डाॅ0 आभा मिश्रा पाठक, रिपोर्ट डाॅ0 सरिता रानी तथा धन्यवाद ज्ञापन डाॅ0 सरस्वती कुमारी (कार्यक्रम संयोजिका) ने दिया।

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