November 24, 2020

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वाराणसी : अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर काशी में दी गई निर्भया के दोषियों को प्रतीकात्मक फांसी

धर्म की नगरी काशी में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर बूंदी परकोटा घाट पर निर्भया के दोषियों को प्रतीकात्मक फांसी दी गई।

वाराणसी : न्यायालय द्वारा निर्भया के दोषियों को दोषी करार दिए जाने के बाद फांसी के लिए मिल रही तारीख पर तारीख मिलने से क्षुब्ध काशीवासियों ने रविवार को बाबा विश्वनाथ को साक्षी मानकर गंगा के तट पर घाटवॉक की तरफ से बूंदी परकोटा घाट पर निर्भया केस पर आधारित नाट्य रूपांतरण के माध्यम से सामाजिक रुप से बहिष्कृत कर चारो दरिंदों के प्रतीकात्मक पुतले को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं ने फांसी पर दी गई।

बूंदी परकोटा घाट पर निर्भया के दोषियों को दी गई फांसी

बूंदी परकोटा घाट पर रंगकर्मियों द्वारा एक लघु नाटक का मंचन किया गया। जिसमें जज की भूमिका में अष्टभुजा मिश्र, निर्भया के वकील के रुप में गौरव कुमार सिंह, बचाव पक्ष के वकील ए. पी. सिंह के रुप में वृजेश उपाध्याय और निर्भया की माँ के रुप में नीलम मौर्या ने भूमिका निभाया। वही थोड़ी देर अदालत चलने के बाद जज ने कहा काशी आज दोषियों को मानसिक रुप से फांसी देकर यह मांग करती है अब अबिलम्ब दोषियों को फांसी दी जाए।

भोलेनाथ की नगरी में दंड का तात्काल प्रावधान : प्रो. वीएन मिश्रा

इस दौरान घाटवाक के कल्पनाकार व प्रख्यात न्यूरोलॉजिस्ट प्रो. विजयनाथ मिश्र ने कहा कि ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता’ वाली भोलेनाथ की नगरी में दंड का तात्काल प्रावधान है। जनता को ख़ुशी थी, इस बार होलिका जलने से पहले दरिंदे फांसी झूलेंगे मगर वह संविधान के लचीलेपन के कारण बचते चले जा रहे है। ऐसे में हम लोगों ने प्रतीकात्मक दरिंदों के पुतले को फांसी झुलाकर मानसिक शांति प्राप्त की है और देश की सभी बेटियों-माताओं और बहनों को सम्मान देने और उनकी सुरक्षा का संकल्प लिया है।

इस अवसर पर शैलेश तिवारी, शिव विश्वकर्मा, युवा नेता अमित राय, विशाल दीक्षित, कविता गोड़, गोविन्द सिंह, विनय महादेव, संदीप सैनी सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।