वाराणसी : माँ गंगा ने लिया यमुना का रूप, कान्हा ने किया कालियानाग का मर्दन

वाराणसी। काशी के लक्खी मेले में शुमार नाग नथैया मेला सकुशल सम्पन्न हुआ। इसी कड़ी में काशी का प्रसिद्द नाग नथैया मेला बुधवार को महाराज कुंवर अनंत नारायण सिंह की उपस्थिति में संपन्न हुआ। तुलसी घाट पर वृन्दावन का वह पल जीवंत हुआ। जिसमे भगवान् कृष्ण बिना किसी भय के अपने साथियों की गेंद लेने उस यमुना में छलांग लगाते हैं जिसका जल कालिया नाग के ज़हर के कारण दूषित हो चुका है।

श्री कृष्ण के यमुना में छलांग लगाते ही वृन्दावन में हलचल मची हुई है। मां व्याकुल है और मित्र रो रहे हैं तभी यमुना में हलचल हुई और कालिया नाग के ज़हर छोड़ने वाले फन पर सवार होकर बंसी बजाते कृष्ण मुरारी यमुना की सतह पर दिखे तो चारों तरफ भगवान् श्रीकृष्ण का जयघोष सुनी देने लगा। ढोल, घंटे, डमरू और शंख की गगन भेदी स्वरों से गंगा तट गुंजित हो उठा। जय कन्हैया लाल के गगनभेदी उद्घोष से स्वर्ग में बैठे देवताओं को भी इस बात की सूचना दे दी कि भगवान कृष्ण ने कालिय नाग पर विजय प्राप्त कर ली है।

तुलसी घाट पर पिछले साढ़े चार सौ सालों से चली आ रही परंपरा के क्रम में नाग नथैया लीला का आयोजन हुआ। प्रभु श्रीकृष्ण के दर्शन को कुंवर अनंत नारायण सिंह भी पहुंचे। जैसे ही रामनगर किले से उनका स्टीमर तुलसी घाट पहुंचा जनता ने हर हर महादेव के नारे से स्वागत किया। महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र समस्त काशीवासियों की ओर से कुंवर अनंत नारायण सिंह को पुष्प अर्पित किया। कुंवर ने लीला पूरी होने पर भगवान को पुष्पों की माला और सोने की गिन्नी अर्पित की।

तुलसीदास द्वारा शुरू की गयी इस लीला को मौजूदा व्यवस्थापक प्रोफ़ेसर और संकटमोचन मंदिर के महंत विश्वम्भर नाथ मिश्रा के देख रेख में सम्पन्न कराया गया। इस दौरान कोविड गाइडलाइन के अनुरूप भक्तों का तुलिसघाट पर जमावड़ा पहले की अपेक्षा कम दिखा।

इस संदर्भ में अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास  के व्यवस्थापक और महंत विश्वम्भर नाथ मिश्रा ने बताया कि कोरोना महामारी के चलते सीमित लोगों की मौजूदगी में 450 वर्ष से ज्यादा पुरानी परंपरा का निर्वहन हुआ।

उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि जन-जन भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका निभाए और जिस तरह भगवान श्री कृष्ण ने कालीया नाग को दाह कर यमुना को प्रदूषण मुक्त किया उसी तरह गंगा के प्रदूषण मुक्त करने लोग कदम आगे बढ़ाएं।

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