वाराणसी : बीएचयू Phd प्रवेश प्रक्रिया में OBC वर्ग के छात्रों के साथ हो रहे भेदभाव का निराकरण करने की मांग

वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय(बीएचयू) पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को लेकर विवाद थमता नजर नही आ रहा है। इसी को लेकर आज बीएचयू स्थित मधुबन में छात्रों ने प्रेस वार्ता किया। जिसमें छात्रों ने प्रदर्शन कर पीएचडी प्रवेश परीक्षा में ओबीसी वर्ग के छात्र-छात्राओं के साथ हो रहे भेदभाव का जल्द निराकरण हो, इसके साथ ही छात्रावासों में 27 प्रतिशत संवैधानिक आरक्षण भी दिया जाए।

छात्रों की मांग में विश्वविद्यालय के पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधि नहीं नियुक्त किया जाता है जबकि अन्य आरक्षित वर्ग एससी/एसटी के प्रतिनिधि नियुक्त किये जाते है, ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधि न होने के कारण रिसर्च प्रपोजल व साक्षात्कार में जानबूझकर कम अंक दिये जाते है और उन्हें मेरिट से बाहर कर दिया जाता है, अतः ओबीसी वर्ग के लिए प्रतिनिधि नियुक्त किया जाये।

वही छात्रों की दूसरी मांग में पीएचडी प्रवेश परीक्षा में लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार की प्रक्रिया में छात्र-छात्राओं के नाम तथा उनके श्रेणी का उपयोग होता है, जिससे भेदभाव होता है और परीक्षकगण कम अंक देते हैं,जबकि ओ.बी.सी. छात्र-छात्राओं के डिग्री पाठ्यक्रमों के कुल अंको का योग सर्वाधिक या फिर सामान्य वर्ग के छात्र-छात्रों से अधिक होता है। रिसर्च प्रपोजल और साक्षात्कार में कम अंक दिए जाने के वजह से डिग्री पाठ्यक्रमों में अन्य छात्रों की तुलना में ओबीसी वर्ग के ज्यादा अंक होते हुए भी ओबीसी वर्ग के छात्र मेरिट से बाहर हो जाते है। अतः नाम के स्थान पर अनुक्रमांक और कूट संख्या का प्रयोग किया जाए।

विश्वविद्यालय के किसी भी पाठ्यक्रम में पढ़ने वाले ओ.बी.सी. वर्ग के छात्र-छात्राओं को छात्रवासों में आरक्षण की सुविधा नहीं दी जाती है। अतः प्रत्येक पाठ्यक्रम में अध्यनरत छात्र-छात्राओं के लिए सविंधान प्रदत्त 27 प्रतिशत आरक्षण अविलंब लागू किया जाय। विश्वविद्यालय की सभी कमिटियों में ओबीसी का प्रतिनिधि अविलंब नियुक्त किया जाये।

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