November 26, 2020

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वाराणसी : BHU में होगा सबसे सस्ता बोन मैरो ट्रांस्प्लांटेशन, नही काटने पड़ेंगे देश- विदेश के चक्कर

वाराणसी : कैंसर रोगियों और उनके परिजनों के लिए अच्छी खबर है। अब बनारस या पूर्वांचल ही नहीं समूचे उत्तर भारत के ऐसे रोगियों को दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू जाने की जरूरत नहीं होगी। ऐसे मरीजो का मुकम्मल इलाज अब काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में होगा। इतना ही नहीं, यहां सबसे सस्ता इलाज होगा। ट्रामा सेंटर परिसर स्थित बोन मैरो ट्रांसप्लांट एंड स्टेम सेल रिसर्च सेंटर के ट्रायल रन के तहत चिकित्सकों की टीम ने पहले बोन मैरो प्रत्यारोपण में सफलता पाई है।

इस सम्बंध में कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने बताया कि  बीएचयू में बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन और स्टेम सेल रिस्च सेंटर की स्थापना की गई है। इस केंद्र में हाई इफिसिएंसी पर्टिकुलेट एयर (एचईपीए) जैसी सुविधा उपलब्ध है। 12 बिस्तर वाले इस केंद्र में सीजीएमपी स्टैंडर्ड के अनुसार क्लिनिकल एंड बेसिक रिसर्च एंड सर्जरी व अन्य क्लिनिकल सेवाएं प्रदान करने के लिए उच्च स्तरीय आधुनिक मशीनों को स्थापित करने की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है। इसके अलावा 3 स्टेम सेल रिसर्च लैब तथा शोध व मरीजों की चिकित्सा के लिए एईआरबी द्वारा स्वीकृत आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।

उन्होंने बताया कि हाल ही में बीएचयू के बोन मैरो ट्रांसप्लांट एंड स्टेम सेल रिसर्च सेंटर में पहली बार एक ब्लड कैंसर पीड़ित मरीज का सफल ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन किया गया। यह ट्रांसप्लांटेशन ईमैटो ऑंकोलॉजी एक्सपर्ट डॉ राहुल भार्गव (निदेशक, फोर्सिट मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम, हरियाणा) के मार्गदर्शन में हुआ। इसमें बीएचयू के बोन मैरो ट्रांसप्लांट एंड स्टेम सेल रिसर्च सेंटर के प्रभारी डॉ समन्वयक, सर सुंदरलाल चिकित्सालय के पूर्व एमएस प्रो कैलाश गुप्ता, रेसिडेंट डॉ प्राची महापात्रा, आशीष गुप्ता, डॉ निधि सिंह, डॉ विभू खरे, डॉ विक्रम गुप्ता, डॉ मंजीत तथा नर्सिंग स्टॉफ में अनुभव, सूरज, आर राम, अजीत शामिल रहे।

उन्होंने बताया कि ट्रांसप्लांटेशन के बाद मरीज को मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा गया है जहां वह दिन-प्रतिदिन ठीक हो रही है। उन्होंने कहा कि इन सब मे सबसे अच्छी बात यह है कि यह ट्रांसप्लांटेशन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें डोनर (दानदाता) की जरूरत नही होती। मरीज के खुद के बोन मैरो का उपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि देश में हर साल लगभग 20,000 बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन की जरूरत होती है जिसमें से सिर्फ 10 फीसद लोग ही बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन करा पाते हैं। बीएचयू में बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन एंड स्टेम सेल रिसर्च सेंटर की स्थापना से दिल्ली, मुंबई, मद्रास, बैलोर जैसे दूर दराज के इलाकों में नहीं जाना पड़ेगा। हीमोटॉपिएटिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांटेशन से विभिन्न जटिल बीमारियों का सफल इलाज हो पाएगा। साथ ही रिसर्च सेंटर में शोध के जरिए नई बीमारियों के इलाज के रास्ते भी खोजे जाएंगे।

वही इस सम्बंध में चिकित्सकों के मुताबिक महिला मरीज पूर्वांचल की ही है, जो अब पूरी तरह स्वस्थ्य है। जल्द ही उसे छुट्टी दे दी जाएगी। बीएचयू के चिकित्सकों के मुताबिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट भारत में सबसे पहले क्रिश्चियन मेडिकल कालेज-वेल्लोर में शुरू हुआ था, जहां वर्तमान में बोन मैरो प्रत्यारोपण का खर्च 15-20 लाख रुपये है। वहीं टाटा मेमोरियल में 12 से 15 लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं। बीएचयू अस्पताल में पहले बोन मैरो प्रत्यारोपण में लगभग पांच लाख रुपये खर्च हुए, जो बाकी जगहों के मुकाबले आधे से भी कम है।

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