December 5, 2020

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वाराणसी : बीएचयू अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही, मृतक एसीएमओ के शव के जगह पर परिजनों को थमाया महिला का शव

वाराणसी : देश में जहां कोरोना वायरस का कहर जारी है, तो वही जनपद वाराणसी में भी कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। वही दूसरी तरफ बीएचयू अस्पताल प्रशासन के द्वारा बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। जब कोरोना पॉजिटिव मृत का शव लेने पहुंचे परिजनों को दूसरे की शव दे दी गयी और उनके व्यक्ति की लाश अन्य को दे दी गयी, जिसने शव का दाह संस्कार भी कर दिया। फिलहाल इस घटना की सूचना के बाद से हड़कंप मचा हुआ है।

जानकारी अनुसार बीएचयू हॉस्पिटल में कोरोना के ईलाज के लिए भर्ती रि‍टायर्ड पीपीएस अधि‍कारी की बुधवार की सुबह मौत हो गई। इसके बाद परिजनों को सूचित कर अस्पताल प्रशासन ने जरूरी कार्रवाई के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया। मृतक के परिजनों के अनुसार कुछ दूर जाने पर शव के कद काठी को देखकर यह एहसास हुआ कि शव उनके व्यक्ति का नहीं है, तो उन्होंने पीपीई किट खोलकर चेहरा देखा तो शव किसी और का मि‍ला।

मृतक के परिजनों के अनुसार बीएचयू वापस पहुंचे तो पता चला कि उन्हें दिया गया शव एडिशनल सीएमओ  का था जिनकी देर रात कोरोना से मौत हुई थी। जिसको वापस कर उन्होंने रि‍टायर्ड पीपीएस अधि‍कारी का शव ढूंढना शुरू किया तो पता चला कि वो भी किसी और को दे दिया गया और उसे वह लोग लेकर हरिश्चंद्र घाट भी जा चुके हैं। वहां जाकर देखा गया तो वो लोग शव का दाह संस्कार कर चुके थे।

इस लापरवाही के बाद जिला प्रशासन की ओर से जारी बयान में बताया गया कि सर सुंदरलाल चिकित्सालय बीएचयू में आज भोर से पहले अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ जंग बहादुर की मृत्यु हुयी। बीएचयू के मर्चरी स्टाफ द्वारा डॉ जंग बहादुर के डेथ पेपर के साथ उनके रैपर पैक्ड डेड बॉडी के स्थान पर एक अन्य मृत व्यक्ति की रैपर पैक्ड डेड बॉडी दे दी गयी थी।

कोरोना काल में प्रोटोकॉल के अनुसार रैपर पैक्ड डेड बॉडी दिये जाने का ही प्रावधान है। हरिशचन्द घाट पर इस डेड बॉडी के लकड़ी की चिता पर दाह संस्कार के समय डेड बॉडी के परिजन पहुंचें और बताया कि यह डेड बॉडी उनके परिवार की है और शायद डॉ जंग बहादुर की डेड बॉडी अभी मर्चरी में ही हैं।

डॉ जंग बहादुर के परिजन बीएचयू मर्चरी में पहुँचकर उनकी डेड बॉडी को प्राप्त किया तथा उसे विद्युत शवदाहगृह में ले जाकर अपने तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं अन्य स्टाफ की उपस्थिती में अंतिम संस्कार किया। दूसरे मृत व्यक्ति के परिजनों ने घाट पर बिना किसी विरोध के जलती हुयी चिता को स्वीकार किया तथा आगे अंतिम संस्कार के रीति-रिवाजों को पूर्ण कराया।