वाराणसी : BHU में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कांफ्रेंस का होगा आयोजन

वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय(बीएचयू) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निश्चेतना विभाग के तत्वाधान में इंडियन एसोसिएशन ऑफ़ पेडिअट्रिक एनेस्थेसिओलॉजिस्ट्स की 12वीं राष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन 7 फरवरी से 9 फरवरी तक आयोजित की जाएगी। इस सम्बंध में कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ पुष्कर रंजन ने बताया की कार्यक्रम के अंतर्गत देश-विदेश के ख्यातिलब्ध चिकित्सको के द्वारा नवजातशिशुओं व बच्चों में विभिन्न प्रकार के छोटे-बड़े ऑपरेशन में आने वाली समस्याओं व बीमारियों के प्रभाव और उनसे उपजी परिस्थितियों व उसके निराकरण में प्रयुक्त विधियों को समझने व उनका उचित इलाज़ करने के लिए आवश्यक तकनीक पर चर्चा की जाएगी इसके साथ ही चिकित्सकों को नवीन उपकरणों व तकनीक के प्रयोग के लिए प्रशिक्षित भी किया जाएगा।

वही इस कार्यक्रम के पहले दिन बच्चों में मेकेनिकल वेंटिलेशन, अल्ट्रासाउंड गाइडेडनर्व ब्लॉक्स डिफिकल्ट पेडियेट्रिक एयर-वे, व पेडियेट्रिक पेरिओपेरटिव लाइफ सपोर्ट(PPLS) जैसे चार प्रमुख विषयों पर कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। वही इसका मुख्य कांफ्रेंस का उद्घाटन 8 फ़रवरी को के.एन.  उडुपा सभागार में किया जाएगा। जिसमे देश विदेश के ख्यातिप्राप्त लगभग 300 चिकित्सक अपने अनुभव व अन्तर्राष्ट्रीय स्थापित चिकित्सा मानदंडो से बच्चो को दी जानें वाली निश्चेतना पर चर्चा करेंगे।

पहले दिन नवजात शिशुओं को दी जाने वाली निश्चेतना, रिसकसिटेश, प्री ऑपरेटिव केयर जैसे विषयों पर व्याख्यानमाला आयोजित की गई है। जबकि दुसरे दिन एयर-वे मैनेजमेंट और रीजनल एनेस्थीसिया जैसे विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम के आयोजन अध्यक्ष व विभागाध्यक्ष डॉ एस. के माथुर ने बताया की नवजात शिशुओं व छोटे बच्चों की शारीरिक संरचना व कार्यप्रणाली वयस्कों से काफी अलग होती है। इन्हे निश्चेतना देना व सफलता पूर्वक ऑपरेशन का होना काफी जटिल कार्य है। जिसमें विभिन्न परिस्थितियों का सामना करना होता है जो चिकित्सकीय रूप से न सिर्फ बहुत अधिक क्लिष्ट अपितु उनका सही प्रबंधन न करने पर मरीज की जान बचाना बहुत मुश्किल हो जाता है।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य उपरोक्त परिस्तिथियों के उचित प्रबंधन के लिए नए व पुराने चिकित्सको को तैयार  करना और आगे नयी पीढ़ी के लिए प्रशिक्षण प्रदाता तैयार करना भी है। डां रंजन ने बताया की वर्तमान परिदृश्य मे जहा छोटे बच्चों जन्मजात बीमरियो का प्रतिशत पूर्व की तुलना में बढा है इसलिए चिकित्सा जगत में रोज़ नई तकनीकों व उपचार के तरीको का आना व उनके विषय में चिकित्सकों का व्यवहारिक ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। इस उद्देश्य से ही इंडियन एसोसिएशन ऑफ़ पेडिअट्रिक अनेस्थेसिओलॉजिस्ट्स का गठन किया गया है। जिसकी 12वी राष्ट्रीय कांफ्रेंस के आयोजन का सौभाग्य आई.एम.एस. के निश्चेतना विभाग को मिला है।

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