March 4, 2021

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वाराणसी : BHU छात्रों का धरना दूसरे दिन भी जारी, विश्वविद्यालय पूर्ण रूप से खोंलने की मांग

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में पूरी तरह से खोंलने की मांग को लेकर छात्रों का धरना दूसरे दिन भी जारी रहा है। छात्रों का आरोप है की देश मे सभी संस्थाए खुल चुकी है। लेकिन बीएचयू अभी तक पूरी तरह से नही खोला गया है। जिससे विश्वविद्यालय के सभी छात्रों का भविष्य अधर में होता जा रहा है। कोरोना काल के लगभग 11 माह बाद बीएचयू अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए सोमवार को ऑनलाइन व ऑफलाइन क्‍लास की सुविधा के साथ खुल गया।

बीएचयू अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए सोमवार से ही ऑनलाइन और ऑफलाइन सुविधा के साथ खुल गया है। वही विश्वविद्यालय को पूरी तरह से खाेेलने की मांग को लेकर पहले और दूसरे वर्ष के छात्र सोमवार को धरने पर बैठ गए। विश्वविद्यालय खुलवाने को लेकर 200 छात्र मुख्य द्वार पर धरना देने लगे। जानकारी होने के बाद विश्‍वविद्यालय प्रशासन के अधिकारी मौके पर छात्रों को समझाने बुझाने के लिए पहुचें। आक्रोशित छात्र पूरी तरह परिसर को खोलने की मांग पर अड़े रहे।

दोपहर तक बीएचयू प्रशासन और छात्रों के बीच जिच कायम रही।सुबह धरना शुरू करने के दौरान छात्र बीएचयू सिंहद्वार के दोनों मिनी गेट बंद करवा रहे थे। इसके बाद डिप्टी चीफ प्रॉक्टर प्रो. बी सी कापड़ी अपने प्राक्टोरियल बोर्ड के साथ पहुंचे इसके बाद दोनों छोटे द्वार बंद करने से छात्रों को रोक दिया। इससे वहां छात्रों और प्राक्टोरियल बोर्ड के बीच काफी गहमागहमी भी नजर आई। इस वजह से सुबह-सुबह सिंह द्वार पर ट्रैफिक बाधित हो गया।

वही प्रदर्शन कर रहे छात्र विपुल सिंह का कहना है कि यूजीसी की गाइडलाइंस के अनुसार कैंपस अब तक पूर्णतः खुल जाना चाहिए। जब बनारस में ही सभी महाविद्यालय खुल चुके हैं। छात्रों ने आरोप लगाया कि सब संस्‍थान खुल चुके हैं लेकिन बीएचयू अब तक नहीं खुल सका है।

विपुल ने कहा छात्रों का भविष्‍य खराब हो रहा है, कोरोना संक्रमण के बाद अब देश के सभी संस्‍थान खुल चुके हैं लेकिन बीएचयू में सोमवार से पढ़ाई लिखाई शुरू होने के बाद भी पूरी तरह छात्रों के लिए पढ़ाई लिखाई शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में छात्रों का भविष्‍य अंधकार में है जबकि सत्र का आखिरी समय होने से परीक्षा की तैयारी भी बेहतर तरीके से नहीं हो पा रहा है।

वहीं सुबह इसी मुद्दे को लेकर मुख्य द्वार पर लगभग 200 छात्र इकट्ठा हो गए और धीरे-धीरे संख्या बढ़ती ही जा रही है।

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