May 9, 2021

Uttar Pradesh Samachar

Hindi News, Today Hindi News, Uttar Pradesh News

वाराणसी : BHU प्रोफेसर विजय नाथ मिश्रा का दावा, गंगा जल में मौजूद हैं कोरोना वायरस मारने के तत्व

देखे वीडियो

वाराणसी : वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से पूरा विश्व जूझ रहा है। इसके साथ ही इलाज के लिए के देशों के वैज्ञानिक दिन-रात जुटे है। इसी बीच भारत मे कोरोना का इलाज में मोक्षदायिनी मां गंगा का जल कोरोना का खात्मा करने का दावा किया जा रहा है। इसी बीच काशी हिंदू विश्वविद्यालय की तरफ से यह दावा किया गया कि “गंगाजल से कोरोना के इलाज में मदद मिल सकती है।” इसके लिए पांच चिकित्सकों ने क्लिनिकल रिसर्च किया है।

बीएचयू स्थित सर सुन्दरलाल अस्पताल के पूर्व मुख्य चिकित्साधिकारी व न्यूरोलॉजिस्ट प्रो० विजयनाथ मिश्र ने यह दावा किया है की गंगाजल कोरोना के लिए कारगर साबित हो सकता है। उन्होंने ने बताया कि पूरे विश्व कोरोना वैश्विक महामारी से जूझ रहा है। अभी तक इसकी कोई दवा या वैक्सीन नही आई हैं। कुछ लोगों ने वैक्सीन के दावे किए है। लेकिन उसके रिजल्ट्स अच्छे नही आ रहे है। आज ही न्यूज़ पेपर में देखा कि कोविड मरीज प्लाज्मा चढ़ाने की बात हो रही थी। उसके भी रिजल्ट्स निगेटिव आ गए हैं।

उन्होंने ने बताया कि ऐसे दौर में हम लोग चाहते है कि कोई न कोई एक परफेक्ट इलाज कोविड के मरीजों को मिले। इस दौर में एक रिसर्च न्यूरोलॉजी विभाग द्वारा किया जा रहा है। जो अभी चल रहा है। की क्या गंगा जी के किनारें रहने वाले या उसको इस्तेमाल करने वाले लोंगों में कोविड की पॉसिबिलिटी कितनी ज्यादा है।

प्रो० मिश्र ने बताया कि इसमे दो रिजल्ट्स आये जिनमें एक रिजल्ट आया कि गंगा जी जिन 42 जिलों से होकर गुजरती है। वहां की रिकवरी रेट शुरू से ही अप्रैल से बाकी जगहों से अच्छा रिजल्ट मिला हैं। दूसरा गंगा जी जो 8 जगहों जैसे उत्तरांचल, उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल जो होकर गुजरती है। यहां पर भी मृत्यु दर काफी कम हैं। तीसरी चीज इसकी अपेक्षा साउथ इंडिया में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र-प्रदेश इन जगहों में डेथ भी काफी ज्यादा हैं और रिकवरी रेट भी काफी कम है। तो इसमें एक महत्वपूर्ण बात यह निकलती है कि क्या माँ गंगा गंगा का जल कुछ इसका बचाव में काम कर रहा हैं। इसको जब हमने बनारस के लोगों में देखा जो लोग गंगा में स्नान करते है या गंगा जी का जलपान करते हैं। ऐसे 273 लोगों में से देखा गया जो 15 वर्षों से ज्यादा से नहाते है। ऐसे किसी मे अभी तक कोई कोरोना के लक्षण नही मिले ना हुआ है। वही इनके परिवारों में जो 217 लोगों में जो गंगा जी मे ना नहाते है न जलपान करते है। ऐसे लोगों में करीब 30 लोगों में कोरोना हुआ जो 2 लोगों जान भी चली गई।

उन्होंने कहा अब हम यह भी नही कर रहे कि इसका गंगा जी से ही इसका इलाज हुआ। लेकिन यदि 100 वर्ष पुरानी बात देखे जब कोरोना का पहला रिसर्च आया था। वो वे कहा था जो गंगा जी का जल जो पीते है या उसके नजदीक रहते है। गंगा जी का जल इस्तेमाल करते है उसमें कोरोना कम था। बाद में पता चला कि बैक्टेरियो फेजेस के कारण कोरोना कम हुआ। इसलिए फेज थैरेपी का डेवलपमेंट हुआ। इसी फे थैरेपी को देख रहे है कि क्या गंगा की जो फेजेस है? इनका क्या कोरोना पर अच्छा प्रभाव हैं? जो रिसर्च हमने रिव्यू किया। उस पर यह लग रहा है की गंगा के जल में जो फेजेज है या कहे वायु फेजेज इन वायु फेजेज का कोविड या कोविड लाइव वायरस पर अच्छा प्रभाव के संकेत मिले है। अब हमलोग का अगला कदम यह है कि इसका हम क्लीनिकल ट्रायल करें।

उसके लिए एथिकल अप्रूवल का इंतेजार कर रहे है बीएचयू से दूसरा हम लोगों ने अमेरिका भी बात किया है कि कोविड कल्चर पर गंगा जी के निकाले गए फेजेस पर क्या प्रभाव है। यदि वो कार्य अमेरिका में हो जाता है, तो हम यह डेफिनेट तौर पर कर सकते हैं की गंगाजल के फेजस का कोविड-19 के इलाज के लिए क्या सकता है। वह प्रोसेस अभी अमेरिका में चल रहा है लेकिन रिव्यू जो उन्होंने किया है उसके रिजल्ट कुछ अच्छे लग रहे हैं।

प्रो० मिश्र ने कहा हमारे अरुण गुप्ता जी जो भारत सरकार के गंगा मामलों के न्याय मित्र है इलाहाबाद हाईकोर्ट में उन्होंने सबसे पहले इस बात को राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखकर बताई थी कि क्या गंगा जी के जल से कोविड इलाज का क्लिनिकल ट्रायल कर सकते है। राष्ट्रपति भवन से चिठ्ठी आईसीएमआर गयी वहां से चिठ्ठी प्रोसेस ट्रेण्डोन हो गया था कि क्लिनिकल डाटा नही हैं। अब हमको लगता है काफी क्लिनिकल डाटा अवेलेबल है अरुण गुप्ता जी की बात लगभग सही लगती है की गंगा जी के जल से जो यह फेजेस पाई जाती है इसका कोरोना ओर अच्छा प्रभाव हैं। हो सकता है हमने आने-वाले दिनों में एक नई दिशा की ट्रीटमेंट फीज थैरेपी फ़ॉर कोरोना की घोषणा करेंगे।

इस क्रम में अधिवक्ता अरुण कुमार ने बताया कि इस समय पूरा विश्व कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहा है। काफी कुछ लोग सफर कर रहे है। मैं करीब जनवरी से ही न्यूज़ के माध्यम से पढ़ रहा था कोरोना का प्रकोप पूरे विश्व मे धीरे-धीरे बढ़ रहा है। तो मेरे मन में एक विचार आया कि क्यों न हम इसके विषय मे कुछ कर सकते है तो करना चाहिए। और चुकी मैंने गंगा के क्यूरेटिव वैल्यू और गंगा के ठीक होने की जो इसकी वैल्यू है उसके साइंटफिक वैल्यू पर पहले से ही इस लेक्चर भी दे रहा था। और तमाम इंस्टीट्यूट में मैंने जाकर इसपर चर्चा भी की। मेरे मन में एक विचार आया क्यों ना हम इस विषय पर कार्य करें। तो मैंने पूरे विश्व के जितने भी जनरल साइंटिफिक का अध्ययन किया।

उन्होंने कहा अध्ययन करने के पश्चात जब 25 तारीख पूरे भारतवर्ष में जब लॉकडाउन लगा तो मैंने सारी चीजों को या पेपर वर्क करके अध्ययन करके इकट्ठा करके साइंटिफिक पेपर तैयार किया। साइंटिफिक पेपर को रिसर्च के बेसेस पर मैंने ऐसे पेपर तैयार किया और उस साइंटिफिक पेपर को राष्ट्रपति के पास भेजा। और राष्ट्रपति जी से मैनें रिक्वेस्ट की आप इसे देखिये की इस पर कार्य होना चाहिए या नही की गंगा में क्यूरेटिव वैल्यू है। तो उस विषय को देखते हुए राष्ट्रपति जी ने आगे फारवर्ड करते हुए आयुष मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा। मैंने एक रिप्रेजेंटस नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा को भी भेजा।

नेशनल मिशन फॉर गंगा ने राष्ट्रपति और इन सभी तमाम लोगों के पत्र के बाद उसको उन्होंने इंडियन काउंसियल ऑफ रिसर्च को भेजा और कहा इस पर जो गुप्ता जी ने लिखा है। इस आप रिसर्च कीजिए और देखिये इससे क्या फायदा हो सकता है, तो उस पर 29 अप्रैल 2020 को प्रजेंटेशन आईसीएमआर ने लिया। जब 29 अप्रैल को जब प्रजेंटेशन लिया था तो मैंने इस बात को रखा कि गंगा के अंदर बैक्टेरियो फ़ाज है जो वायरस को भी मारता है। जो कि मैंने साइंटिफिक रिसर्च के बेस पर मैंने लिखा है।

इस पर दोनों ने कहा क्लिनिकल डाटा दीजिये तो मैं एक वकील आदमी हूं। क्लिनिकल डाटा नही दे सकता था। तो मैंने इज़के बाद काशी हिंदू विश्वविद्यालय में डॉ. विजयनाथ मिश्रा और तमाम लोगों से संपर्क किया और एक 5 डॉक्टरों की टीम अप्पोइंट की उन 5 डॉक्टरों ने मिलकर इस पर क्लिनिकल डाटा तैयार किया और उस क्लिनिकल डाटा को इंटरनेशनल जनरल में भेजा हैं। जो दो-तीन दिन पहले मेरे पास ई-मेल भेजा है कि एप्रूव हो गया है।

विश्व के तमाम डाक्टर्स ने और स्पेशलिस्ट ने उसको अध्ययन किया और अध्ययन करने के बाद उसको माना है कि गंगाजल के अंदर बैक्टेरियो फ़ाज वायरस को भी मारता है और इस विषय पर डॉक्टर साहब की टीम ने और बीएचयू के जो सारे डॉक्टर है उन लोगों ने एथिकल कमेटी में भी इस पर प्रपोजल पर रखा हैं। मुझे उम्मीद है कि एक स्प्रे भी बनवाया है। स्प्रे के बेसेस पर केवल 10 रुपये की दवा बनेंगी और वो 10 रुपये की दवा केवल गंगा से बनेंगी वो कोरोना को भगा देंगी। और हमारा देश एक बार फिर से विश्व गुरु हो जाएगा। इस लिए हम लोग इस काम मे लगें हैं। की भारत की गरीब जनता को सबसे सस्ती दवा जो है मुहैया हो सके। और बैक्टेरियो फ़ाज जो कि वायरस को मार देता है। इसलिए हम लोग बैक्टेरियो फ़ाज पर स्टडी करा रहे है। और ये चाहते है कि इससे दवा निकल सके।