December 3, 2020

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वाराणसी : BHU के सदस्यों ने लिया राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर आयोजित सम्मेलन में हिस्सा

वाराणसी : मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार, एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा में परिवर्तनकारी सुधारों पर’ आयोजित सम्मेसलन में आज काशी हिन्दू विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने वीडियो लिंक के माध्यम से भागीदारी की।काशी विश्वविद्यालय के विज्ञान संस्थान के सेमिनार कॉम्पलेक्स में इस सम्मेलन के सीधे प्रसारण की विशेष व्यवस्था की गई थी। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उद्घाटन भाषण दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को व्यापक विचार-विमर्श और लाखों सुझावों पर मंथन के बाद मंजूरी दी गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश भर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर स्वस्थ बहस और विचार-विमर्श हो रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य राष्ट्रीय मूल्यों और राष्ट्रीय लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करते हुए युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करना है।

उन्होंने कहा कि यह नीति 21वीं सदी के भारत “न्यू इंडिया” को सशक्त बनाने के लिए युवाओं के लिए जरुरी शिक्षा और कौशल, देश को विकास की नई ऊंचाइयों पर आगे बढ़ाने और भारत के नागरिकों को और सशक्त बनाने के लिए उन्हें अधिकतम अवसरों के लिए अनुकूल बनाने की नींव रखती है।

वही इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने उच्च शिक्षा के संभी संस्थानों का आह्वान किया कि वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर वेबिनारों का आयोजन करें। उन्होंने कहा कि ये अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि नई शिक्षा नीति का पूरे देश में दिल खोल कर स्वागत हुआ है और लोगों ने न केवल शिक्षा सुधारों को लेकर सरकार के मज़बूत संकल्प को समझा है बल्कि उसके विभिन्न विकासात्मक सुधारों पर विश्वास व्यक्त कर उन्हें क्रांतिकारी बताया है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, 21 वीं सदी की पहली शिक्षा नीति है और इसका उद्देश्य देश की वर्तमान एवं भावी पीढ़ी के सर्वांगीण विकास के लिए एक उचित प्लेटफार्म तैयार करना है। उन्होंने कहा कि यह नीति भारत को एक सामयिक, समृद्ध, जीवंत एवं प्रबुद्ध समाज बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी और इस के माध्यम से किए गये व्यापक परिवर्तन हमारी शिक्षा व्यवस्था में एक नये प्रतिमान को स्थापित कर भारत को आत्मनिर्भर बनाने में युगांतकारी सिद्ध होंगे।

मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री संजय धोत्रे ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारत को ज्ञान आधारित वैश्विक महाशक्ति बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगी। इस अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा तैयार करने वाली समिति के अध्यक्ष डॉ. के. कस्तूरीरंगन ने कहा कि नई शिक्षा नीति में समग्र व अंतर्विषयक शिक्षा पर विशेष ज़ोर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि ये नीति बदलते विश्व की आवश्यकताओं के मद्देनज़र शिक्षा क्षेत्र में सुधारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य करेगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय में सचिव (उच्च शिक्षा), श्री अमित खरे ने कहा कि नई शिक्षा नीति को तैयार करने में व्यापक विचार विमर्श किया गया है और यह दुनिया के सबसे व्यापक विचार विमर्शों वाली प्रक्रियाओं में से एक रही है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष प्रो. डी. पी. सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति समावेशी है और इसमें सब के लिए कुछ न कुछ है चाहे वे छात्र हों या शिक्षक। इस अवसर पर “अप्रेंटिशिप (प्रशिक्षुता)/इंटर्नशिप युक्त डिग्री कार्यक्रम हेतु उच्चतर शैक्षणिक संस्थानों के लिए यू.जी.सी. के दिशानिर्देशों” का लोकार्पण किया जिनका उद्देश्य सामान्य डिग्री पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों को रोजगार के योग्य बनाना है।

एक दिवसीय इस सम्मेलन में विभिन्न सत्रों का आयोजन किया गया जिनमें जाने माने शिक्षाविदों, विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के निदेशकों व विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे और नई शिक्षा नीति को अमल में लाने के लिए आगे की राह पर विचारों का आदान प्रदान किया।

इस सम्मेलन में कुलपति, प्रो. राकेश भटनागर, रेक्टर, प्रो. वी. के. शुक्ला, विज्ञान संस्थान के निदेशक, प्रो. ए. के. त्रिपाठी, विज्ञान संकाय के प्रमुख प्रो. मल्लिकार्जुन जोशी, विभिन्न संकायों के प्रमुख, संस्थानों के निदेशक, विभागाध्यक्ष, शिक्षक व अधिकारियों ने सम्मेलन में भागीदारी की। इस दौरान सोशल डिसटेंसिग व कोविड-19 महामारी से बचाव के लिए जारी दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन किया गया।