May 9, 2021

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वाराणसी : रोगी, गरीब, मजलुम और असहायों की मदद के लिए देवदूत बनकर आते हैं काशी के अमन ‘कबीर’

वाराणसी। काशी के अमन कबीर से कौन नहीं वाकिफ होगा। रोगी, गरीब, बेसहारों के लिए काशी का अमन भगवान से कम नही है। मौसम और समय कोई भी हो बस फोन की एक घंटी व सोशल मीडिया पर पहुंची एक खबर पर अमन गरीब और बेसहारों के मदद के लिए पहुंच जाते हैं। बेसहारों का मदद करने वाले अमन को काशी में लोग अमन कबीर नाम से पुकारते हैं।

रोगी, गरीब और असहायों की मदद करते करते काशी का अमन यादव कब अमन कबीर बन गया ये उसे भी नही पता। वाराणसी के अस्पताल से लेकर सड़को तक जिन असहायों के पास लोग जाने से भी इतराते है, उन असहायों की अमन निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं।

कई दिनों से लंका गेट पर पड़े वृद्ध की प्राथमिक उपचार कर पहुंचाया अपना घर आश्रम

ओमकार नाथ (पत्रकार) ने सोशल मीडिया पर चलाए गए वृद्ध की खबर को जैसे ही अमन की नजर पड़ी तत्काल वह सारे काम छोड़ कर उस वृद्ध रोगी की इलाज मदद और सेवा के लिए लंका गेट की तरफ निकल पड़ा। कुछ ही देर में अमन अपने सारे उपकरण और दवा के साथ उस वृद्ध रोगी के पास पहुंच कर इलाज में जुट गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह वृद्धि रोगी लगभग 3 दिनों से लंका गेट के समीप पढ़ा हुआ था तथा इस पर किसी की नजर नहीं पड़ी यह तीन दिनों से यहीं पर कराह कर तड़प रहा था।

अमन कबीर द्वारा इलाज शुरू करने के दौरान लंका सिंहद्वार पर काफी भीड़ जुट गई। इस दौरान लोगों ने समाजसेवी अमन कबीर के साथ पत्रकार ओमकार नाथ की भी लोगों ने भूरी-भूरी प्रशंसा की। समाजसेवी अमन कबीर के कहने पर ओमकार नाथ के साथ ही लोगों ने उसे सामने घाट स्थित अपना घर आश्रम पहुंचाने में वाहन की व्यवस्था भी किए। अपना घर आश्रम पहुंचने के बाद अमन ने बताया कि वृद्ध रोगी का इलाज प्रारंभ हो गया है जहां पर उसे रहने खाने का समुचित व्यवस्था भी कर दिया गया है।

लोगों ने तालियां बजाकर किया अमन का स्वागत

अमन जब इलाज कर रहा था तो लोग हतप्रभ होकर देख रहे थे। अमन द्वारा वृद्ध रोगी का प्राथमिक उपचार के बाद जैसे ही वाहन पर बैठाकर अपना घर आश्रम की तरफ ले जाने को हुए वैसे ही वहां पर मौजूद लोगों ने अमन का ताली बजाकर स्वागत किया। अमन भाई लोगों के इस ताली बजाकर किए जा रहे हैं स्वागत का शुक्रिया किए।

निस्वार्थ भाव से करते हैं सड़क से लेकर अस्पताल तक करते हैं सेवा

वाराणसी के दारानगर क्षेत्र के रहने वाले अमन यादव से अमन कबीर बनने की कहानी बेहद दिलचस्प है। वाराणसी के कचहरी बमब्लास्ट की तस्वीरों ने अमन के मन को कुछ इस कदर झकझोर दिया की पिता के सपने को पूरा करने के बजाय वो गरीबों की मदद के लिए अमन कबीर बन गया। इस घटना के वक्त अमन की उम्र महज 13 वर्ष की थी। बातचीत के दौरान अमन ने बताया की जब शुरुआती समय मे वो गरीब और असहायों की सेवा के लिए मंडलीय अस्पताल जाते थे तो घर पर उनके पिता से उनके डांट खानी पड़ती थी लेकिन बावजूद इसके अमन ने गरीबो के सेवा का काम नही छोड़ा।

असहायों की सेवा पहले पॉकेट मनी से करता था अमन

वाराणसी के अमन कभी अपने पॉकेट मनी के पैसे से अस्पताल और शहर के सड़को पर किनारे पड़े गरीब, असहायों की सेवा करते थे। अमन की मेहनत और जज्बे को देख समाज के कुछ लोग पैसे से उसके इस नेक काम मे मदद कर रहे हैं। अमन ने बताया कि कुछ लोग सेवा भाव को भी व्यवसाय बना लिया है लेकिन वो लोगों से सिर्फ उतने ही पैसे लेते है जितने उसे किसी की मदद में खर्च करना पड़े। अमन के इस निस्वार्थ भाव को देखते हुए वाराणसी के कई व्यवसाई व संस्था अमन को दवा व आर्थिक मदद करने को तत्पर रहते हैं।

महामारी में जहां लोग घरों में रहते थे वही अमन लोगों की मदद के लिए रहता था तत्पर

कोरोना काल में लोग जहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के कारण एक दूसरे से दूरी बनाकर रखते थे, वही अमन कबीर दीन दुखियों, रोगियों, असहाय, गरीब की सेवा करने में निस्वार्थ भाव से जुड़ा हुआ था। पूछने पर अमन ने बताया कि अगर हम कोरोना के कारण घबरा जाते तो इन गरीब रोगियों तथा शहरों की सेवा कौन करता। कोरोना के बीच हम लोगों की सेवा पूरी सुरक्षा के साथ करते थे। सड़को पर गरीब और असहायों की मदद करने वाले अमन न वैश्वविक महामारी दौरान के दौर में भी सैकड़ो गरीब और असहायों की मदद की है। राशन से लेकर इलाज तक का खर्च अमन ने उठाया है।