वाराणसी : पितरकुंडा के 75 वर्षीय बुजुर्ग ने कोरोना से जीती जंग, BHU अस्पताल से डिस्चार्ज, कुलपति ने बढ़ाया हौसला

वाराणसी : बनारस स्थित पितरकुंडा निवासी 75 वर्षीय बुजुर्ग कोरोना वायरस महामारी को मात देकर आज घर लौट गए। इस मरीज की दो जांच रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद शनिवार को उन्हें के चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, स्थित सुपर स्पेश्यलिटी ब्लॉक से छुट्टी दे दी गई। इस दौरान कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने पुष्पगुच्छ देकर विजय कुमार चौरसिया को शुभकामनाएं दी और उन्हें अगले कुछ दिनों तक अपने स्वास्थ्य का अच्छी तरह से खयाल रखने की सलाह दी।

इस सम्बंध में कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने कहा कि ये बहुत खुशी की बात है कि वे बिल्कुल ठीक हो कर घर लौट रहे हैं और उन्हें चाहिए कि वे खुश रहें, पौष्टिक भोजन करें और सेहत का ध्यान रखें। इस अवसर पर चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. आर. के. जैन, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. एस. के. माथुर, कोविड-19 नोडल अधिकारी प्रो. जया चक्रवर्ती, एनेटॉमी विभाग की प्रोफेसर रोएना सिंह समेत कई चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित थे।

बता दे कोविड-19 पॉज़ीटिव पाए जाने पर इस मरीज को 17 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें हाइपरटेंशन, किडनी से जुड़ी समस्याएं और डाइबिटीज़ जैसी कई स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें थीं। इलाज के दौरान उन्हें आईसीयू में भी रखा गया था। आईसीयू में वे डॉ. बिक्रम गुप्ता औऱ डॉ. आर. के दुबे की देखरेख में थे। डॉ. अनूप और डॉ. मनस्वी चौबे भी उनके इलाज में जुटे थे। छुट्टी देते समय विजय कुमार चौरसिया का चिकित्सकों व अस्पताल कर्मियों ने तालियां बजाकर हौसला बढ़ाया।

SSH की कोरोना ओपीडी सुपर स्पेश्यलिटी ब्लॉक में स्थानांतरित, कोरोना संदिग्धों व पॉज़िटिव मरीज़ों के लिए प्रयोगशाला भी स्थापित

इस बीच, सर सुंदरलाल अस्पताल में कमरा नं 103 में चल रही कोरोना ओपीडी को भी शताब्दी सुपर स्पेश्यलिटी ब्लॉक में स्थानांतरित कर दिया गया है। इसके साथ साथ कोरोना पॉज़िटिव ब्लड टेस्टिंग प्रयोगशाला भी इसी इमारत में स्थापित कर दी गई है। यहां कोरोना ओपीडी स्थानांतरित करने से और ब्लड टेस्टिंग लैब स्थापित करने से कोरोना संदिग्धों और कोरोना पॉज़िटिव मरीज़ों की जांच से लेकर इलाज तक सभी कुछ एक ही जगह पर संभव हो सकेगा।

कोरोना संदिग्धों और मरीज़ों को बेहतर सुविधाएं और इलाज मुहैया कराने के इरादे से आईएमएस, प्रशासन, बीएचयू ने कई क़दम उठाए हैं। इन्हीं में से एक है कोरोना जांच के लिए स्थापित कियोस्क जो कोरोना सेम्पल लेने के लिए काफी सुरक्षित हैं और नमूना लेने वाले को संक्रमण के ख़तरे से बचाता है। फिलहाल चिकित्सा विज्ञान संस्थान में 5 कोविड-19 पॉज़िटिव मरीज़ और 24 संदिग्ध भर्ती हैं।

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