May 9, 2021

Uttar Pradesh Samachar

Hindi News, Today Hindi News, Uttar Pradesh News

वाराणसी : सेवाज्ञ संस्थानम् द्वारा “उत्तिष्ठ भारत” की थीम पर एक दिवसीय सेमिनार का हुआ आयोजन

वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) स्थित शताब्दी कृषि प्रेक्षागृह में सेवाज्ञ संस्थानम् द्वारा उत्तिष्ठ भारत की थीम पर “वैश्विक संदर्भ में व्यक्ति निर्माण तथा भारतीय चिंतन” विषयक पर एक दिवसीय संविमर्श में बतौर मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ० नीलकंठ तिवारी रहे। डॉ० तिवारी ने इस संगोष्ठी का उद्घाटन विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना मदन मोहन मालवीय के चित्र पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

इस दौरान डॉ० नीलकंठ तिवारी ने संगोष्ठी में कहा 15वीं शताब्दी में राजसत्ता ने धर्म-परिवर्तन व संस्कृति त्यागने के लिए जबरन प्रयास किया तो तुलसीदास जैसे संत इसके विरूद्ध खड़े होते हैं और गली-गली में रामलीला का आयोजन करते हैं। जेल में बंद बालगंगाधर तिलक ने गीता रहस्य नामक पुस्तक लिख दिया। आजादी के बाद राष्ट्र किधर जाए, इसपर राजसत्ता को चिंता ही नहीं हुई। सभी रूस, चीन, अमेरिका आदि की तरफ देखने लगे, किसी ने भारतीय-मनीषा की तरफ ध्यान नहीं दिया।

डाॅ नीलकंठ तिवारी ने कहा कि परंपराओं, साहित्य, सांस्कृतिक इतिहास को देखा जाए तो भारत कभी सुसुप्ता अवस्था में नहीं रहा, हमेशा जागृत रहा। विषम से विषम परिस्थिति को भारत ने हल किया। वैदिक ज्ञान को कुछ पोंगा-पंथियों ने संकुचित करने का प्रयास किया। यह काम ईसा पूर्व से चला आ रहा था। लेकिन केरल से निकला 25 साल का नौजवान पूरे देश में शास्त्रार्थ किया, भारतीय विचार को स्थापित करने काम किया, जो बाद में चलकर आदि शंकराचार्य कहलाया। उन्होंने कहा कि गोरक्षपीठ से भी बहुत से संत निकले, जो पूरे भारत में जाकर भारतीय ज्ञान-परंपरा को स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य किए।

चुनौतियों को झटके में मोदी सरकार ने किया समाप्त

उन्होंने कहा कि तीन-तलाक, धारा-370, भ्रष्टाचार जैसी चुनौतियों को मोदी सरकार ने झटके में समाप्त कर दिया। लंबे समय से प्रतीक्षारत अयोध्या में भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है। कोरोना के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साहस से काम लिया। उन्होंने कहा कि चीन, पाकिस्तान से आंख मिलाकर लड़ रहे हैं। मोदी-योगी सरकार आत्मनिर्भर भारत को साकार करने में जुटी है। हमारी सरकार ने 150 देशों को वैक्सीन देने का कार्य कर रही है। एक देश के प्रमुख ने यहां तक कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने संजीवनी बूटी भेज दिया है।

स्वामी विवेकानंद पर बोलते हुए मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय सनातन धर्म के शास्त्रीय पक्ष व उसकी प्रासंगिता के अध्येता मिथिलेशनन्दिनीशरण जी महाराज ने कहा कि समाज में बड़ी दुविधा है कि युवा विवेकानंद को आईकन की तरह लेते हैं, कैरेक्टर की तरह नहीं। यही दुविधा अन्य महानताओं के साथ युवाओं ने किया है। उन्होंने कहा कि विवेकानंद का फाॅलोअर तभी आप हो सकते हैं, जब उनके सामने खड़े होने पर आपका चरित्र दिखने लगे। आदर्श चरित्र आपकी कमियों को दिखाते हैं।

उन्होंने बताया कि विवेकानंद सन्यासी नहीं बनना चाहते थे। उनके समक्ष चुनौतियों ने रामकृष्ण परमहंस के पास ले गईं। भूख से बेहाल रोजगार के लिए भटकते थे विवेकानंद। आज नौकरी न मिले तो सारा ज्ञान व्यर्थ हो जाता है, यही समस्या विवेकानंद के साथ थी। उन्होंने कहा कि जो भी आप करना चाहते हैं, उसकी तैयारी आपकी क्या है। हम उलझनों से भागते हैं। प्रमाण पत्र के लिए दौड़ रहे हैं। युवाओं से अपील करते कहा कि चुनौती चुनना चाहिए, भागना नहीं। यदि आप जीतना चाहते हैं तो इसका अर्थ है कि आसान चुनौती चाह रहे हैं।

मिथिलेशनन्दिनीशरण ने कहा कि हर समय आधुनिक होता है। आधुनिकता इस सन की ही बात है, ऐसा नहीं है। आधुनिकता व्यक्ति के नैतिक बने रहने का है। कोरोना काल में जो चीजें अपनाई गईं, वे सभी विचार सनातन भारत में पहले से हैं। दुनिया समझ चुकी है कि उसके प्रश्नों का जवाब सनातन भारत के पास है। इस मौके पर अन्य महापुरूषों के जीवन चरित पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि पुस्तकों में महापुरूषों के साथ बहुत अन्याय हुआ है। अपने इतिहास, संस्कृति और परंपराओं से मुंह चुराना विकास नहीं है।

रासायनिक खाद, कीटनाशक से धरती माता हो रही बंजर

विशिष्ट अतिथि के रूप में पद्मश्री से सम्मानित किसान चंद्रशेखर सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के आचरण का अनुसरण करके ही आज मैं यहां तक पहुंचा हूं। मैं वकालत तो किया, लेकिन कचहरी रास नहीं आई और मैं कृषि के क्षेत्र में आ गया। खेती करते वक्त कभी सरकार की तरफ नहीं देखा। अपनी मेहनत के बल पर आज कृषि के क्षेत्र में मुझे पुरस्कार मिला है।

उन्होंने कहा कि कभी किसी पर आश्रित मत होइए। किसान स्वाभिमानी रहा है। खेतों में प्रयोग होने वाले रासायनिक, कीटनाशक के कारण धरती माता बंजर होती जा रही हैं। आज के युवाओं से आग्रह है कि अपने खेतों के कम से कम 10 प्रतिशत हिस्से में जैविक कृषि का प्रयोग करिये। जैविक कृषि से उपजे आनाज से बिमारियां निकट नहीं आएंगी।