वट सावित्री व्रत पूजन दिवस पर महिलाओं ने वट वृक्ष का किया पौधरोपण एवं संरक्षण का लिया संकल्प

वट वृक्ष को लेके भारत में लोगों की गहरी आस्था और धार्मिक मान्यता है । लोगों का मानना है कि वट वृक्ष या बरगद के पेड़ के तने में भगवान विष्णु, जड़ में ब्रह्मा तथा शाखाओं में शिव का वास होता है। वट वृक्ष को त्रिमूर्ति का प्रतीक माना गया है।

विशाल एवं दीर्घजीवी होने के कारण वट वृक्ष की पूजा लम्बी आयु की कामना के लिए की जाती है। वहीं वट सावित्री व्रत जिसमे शादीशुदा महिलाएं अपने पतियों के दीर्धायु के लिए वट वृक्ष का पूजन करती है। साथ ही यह वृक्ष चौबीसों घंटे हम ऑक्सिजन भी प्रदान करती है। इसी अवसर पर समाजसेवी सारिका दुबे ने ग्रामीण महिलाओं को जागरूक करते हुए पर्यावरण के महत्वता को समझा कर पौधारोपण कराया ।

उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कोरोना के दूसरे लहर में ऑक्सीजन की कमी से तमाम लोग काल के गाल में समा गए। ऐसे में हमें फिर से प्रकृति की ओर लौटना होगा प्रकृति के बिना मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती हमारे पूर्वजों ने कहा है एक वृक्ष सौ पुत्रों के समान होता है आज अगर हम अधिकाधिक पौधारोपण और उनका संरक्षण करेंगे कभी भविष्य में हमारी आने वाली पीढ़ियों को इनका फायदा मिलेगा इसलिए सभी लोगों इस पहल में शामिल होकर अपने आसपास एक पेड़ अवश्य लगाएं और उनका संरक्षण करें

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