वाराणसी : बीएचयू सुरक्षाकर्मियों के नही छूट रहा वर्दी का मोह,उड़ रही कानून धज्जियां

वाराणसी : चीफ प्रॉक्टर ने क्विक रिस्पांस टीम को फिर पहनाई सेना की वर्दी जिलाधिकारी के संज्ञान को दिया हवाला, परिसर में हालात खराब होने पर हर बार लेते है पुलिस की मदद।

वाराणसी : जिले के पुलिस अधिकारियों की तमाम कोशिशों और चेतावनीयों के बावजूद बीएचयू के सुरक्षाकर्मियों का वर्दी का मोह नहीं छूट पा रहा। हालांकि बीएचयू अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा के लिए जरूरी है। मगर उनका तर्क समझ के परे है कारण कि या सुरक्षाकर्मी परिसर में छात्र-छात्राओं को सिर्फ धौस जमाते ही दिखते हैं और अगर कोई अप्रिय घटना की स्थिति बनी तो यह हर बार जिला प्रशासन के भरोसे ही दिखाई पड़े हैं। बीएचयू की क्विक रिस्पांस टीम परिसर में सेना से मिलती-जुलती वर्दी पहनकर घूमने पर अब सवाल उठने लगे हैं इस बारे में जब यह चुके चित्रा सिंह से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि बीते दिनों जिला अधिकारी और कुलपति की बैठक में सुरक्षाकर्मियों से अलग दिखने के लिए जिलाधिकारी की सहमति से निर्णय लिया गया है।

पहले भी थी वर्दी विवादों में

बीएचयू सुरक्षाकर्मियों की वर्दी को लेकर यह पहला मौका नही है। इससे पहले भी इस पोशाक को लेकर विवाद हो चुका है। इससे पहले सुरक्षाकर्मियों की पोशाक पुलिस की हूबहू वर्दी थी। इसे पहन कर कैम्पस में किसी बात को लेकर चलाया गया था लाठीचार्ज। इससे नही पता चल पाया था की लाठीचार्ज सुरक्षाकर्मियों ने की थी या पुलिस ने।

एसएसपी ने उतरवाई थी वर्दी

पुलिस की अवैध इस्तेमाल को देखते हुए बनारस के पूर्व एसएसपी आ0केप भारद्वाज ने बीएचयू सुरक्षाकर्मियों की पुलिस जैसे वर्दी नही पहनने को दी थी चेतावनी। अगर वर्दी नही बदला तो कार्यवाही होगी। इसके बाद वर्दी बदल कर दूसरा वर्दी बीएचयू प्रशासन ने जारी किए थे।

सेना की वर्दी पहनना है गैरकानूनी

कर्नल वीके ब्याला(रिटा)

सेना की वर्दी सिर्फ सेना के ही जवान पहन सकते है।

बीएचयू सुरक्षाकर्मी यदि सेना के पोसाक पहन रहे है तो नियम के खिलाफ है। द प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी रेग्यूलेशन एक्ट 2005 (पसरा एक्ट ) के अधिनियम की धारा 21 के तहत कोई व्यक्ति,प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड या सुपरवाइजर आर्मी, एयरफोर्स, नेवी, पुलिस या किसी अन्य सशस्त्र बल के समान या मिलती जुलती वर्दी नहीं पहन सकता। अगर वह ऐसा करता है तो जुुर्माना या दंड का भागी होगा।

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