November 29, 2020

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वाराणसी : बनारस के इस मंदिर में दर्शन करने से पूरी होती है मुरादे

वाराणसी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में एक ऐसा अनोखा मंदिर है जो यहां दर्शन मात्र से ही भक्तों की मुरादे पूरी हो जाती है और ये काशी से महज 15 किलोमीटर दूर माधोपुर गांव में स्थित शुलटंकेश्वर महादेव मंदिर है।

वो कहते है काशी के कण-कण में शिव है और यहां की महिमा भी अंनत है काशी को मंदिरों का शहर कहा जाता है और यहां गलियों से लेकर सड़क तक कई ऐसे मंदिर है जिनका पौराणिक और महत्व पुराणों में भी मौजूद है।

ऐसा ही एक मंदिर काशी से महज 15 किलोमीटर की दूर माधोपुर गांव में स्थित शुलटंकेश्वर महादेव का मंदिर है। जो इस मंदिर में एक विशालकाय शिवलिंग है। जो काशी के दक्षिण में बसा यहां क्षेत्र इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है कैकई काशी में उत्तरवाहिनी होकर बहने वाली मा गंगा इसी शुलटंकेश्वर मंदिर के पास घाटो से उत्तरवाहिनी होकर काशी में प्रवेश करती है। ऐसा क्यों और वजह क्या है जो काशी में उत्तरवाहिनी उसी से इस जुड़ी मंदिर की पूरी कहानी है। जहां दूर-दराज से आने वाले भक्तों के सभी कष्टों का निवारण होता है।

यहां के मंदिर के पुजारी बताते है कि इस मंदिर का नाम पहले माधव ऋषि के नाम और माधवेश्वर महादेव था। भगवान शिव की आराधना के लिए उन्होंने ही इस शिवलिंग की स्थापना किया था। यह बात उस वक़्त की है जब गंगावतरण हुआ था।

जब शिव ने दो वचन माँ गंगा के सामने रखा

गंगा अवतरण में समय भगवान शिव ने इसी स्थान और अपने त्रिशूल से मा गंगा को रोककर यह वचन लिया था कि वही काशी को स्पर्श करते हुए प्रवाहित होंगी। इसके साथ ही काशी में गंगा स्नान करने वाले किसी भी भक्त को कोई जलीय जीव हानि नही पहुचाएंगा।

जब माँ गंगा ने दो वचन स्वीकार किया

माँ गंगा जब दोनो वचन स्वीकार कर ली तब भगवान शिव ने अपना त्रिशूल वापस खींचा। तभी से यहां तपस्या करने वाले ऋषियों-मुनियों ने इस शिवलिंग का नाम शुलटंकेश्वर रखा। इसके पीछे यह धारणा थी। जिस प्रकार यहां मा गंगा का कष्ट दूर हुआ उसी प्रकार अन्य भक्तों का कष्ट दूर हो। यही वजह है कि पूरे साल यहां भक्त दर्शन को आते है। और यहां महाशिवरात्रि और सावन में बहुत बड़ा मेला भी लगता है। जहां दूर दराज से आये भक्त अपने मुरादे मागने शिव के सम्मुख आते है।

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