November 26, 2020

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वाराणसी : नाम मात्र का आदर्श थाना कैंट, न्याय के लिए थक हारकर, पीड़ित पहुचा एसएसपी द्वार

वाराणसी : प्रधानमंत्री के नरेंद्र मोदी के संसदीय वाराणसी में एक मामला सामने आया है जहां पीड़ित न्याय पाने के लिए कैंट थाने से थक हारकर ,पीड़ित अब एसएसपी के द्वार पहुँचा।

क्या है पूरा मामला

पीएम मोदी के संसदीय वाराणसी में पुलिस प्रशासन सुस्त दिखाई पर पड़ रही है। बीते दिनों वाराणसी के पुलिस लाईन तिराहे समीप, यशवंत सिंह नामक पीड़ित व्यक्ति अपने पत्नी सरिता सिंह और अपने एक बच्चे के साथ शादी समारोह से घर की ओर लौट रहें थे।

जब बस से उतर कर वह पुलिस लाइन तिराहा पार कर रहें थे, तभी एक बिना नम्बर की आपाची आरटीआर से तीन लोग सवार होकर तेज रफ्तार के साथ आते हुए यशवंत सिंह को टक्कर मार दिया। टक्कर लगते ही यशवंत सिंह सड़क पर गिर गए। तभी आपाची सवार तीन युवकों मे से एक युवक ने पीड़ित यशवंत सिंह को थप्पड़ जड दिया। जब इसका विरोध पीड़ित की पत्नी ने किया तो युवक ने पीड़ित की पत्नी सरिता सिंह को मां-बहन की गाली देते हुए। बाल खींचकर सड़क पर ज़ोरदार धक्का दे दिया। जिससे महिला के बाएं हाथ की उंगली टुट गयी और बाइक चला रहें युवक ने पीडित यशवंत सिंह के सर पर हेल्मेट से प्रहार कर दिया। जिससे यशवंत सिंह के सर में गहरी चोट लग गयी। ये सब देखकर जब आसपास के लोग जुटने लगें तो तीनों युवक आपाची बाइक छोड़कर मौके से फरार हो गए।

कैंट एसओ ने पीड़ित से कहा तुम्हारी औकात नही मुकदमा लड़ने की, कर लो समझौता

वही वह मौजुद लोगों मे से किसी ने 100 नम्बर पर सूचना दिया। मौके पर पहुंची डायल 100 पुलिस ने आपाचे आरटीआर वाहन को कैंट थाने ले गयी। थाने पर पहुंचे पीड़ित यशवंत सिंह ने जब घटना की पूरी जानकारी कैंट थाना प्रभारी विजय बहादूर सिंह को दिया। कुछ समय के बाद ही कैंट थाना प्रभारी ने दूसरे पक्ष के थाने पर आने की बात कहने लगें और पीड़ित के उपर दुसरे पक्ष से समझौता करने का दबाव डालने लगें।पीड़ित ने समझौता करने से इंकार कर दिया, तो कैंट एसओ विजय बहादूर सिंह आग बबुला होते हुए। पीड़ित से कहा से की मुकदमा लड़ने की तुम्हारी औकात और हैसियत नही है। समझौता करके मामला रफा दफा कर लो।

अज्ञात का लिखा गया मुकदमा, थाने से अपाचे हुए नदारद

वही किसी तरह कैंट थाना प्रभारी ने पीड़ित का मुकदमा दर्ज कर लिया। मगर मुकदमें में आपाचे सवार तीनों युवकों को अज्ञात दिखा दिया गया।

सोचने वाली बात यह हो गयी है कि जब दुसरा पक्ष भी थाने पर पहुंचा था। तो मुकदमा अज्ञात पर कैसे क्यो दर्ज कर किया गया ? थाना प्रभारी ने मुकदमा दर्ज भी कराया भी तो गोलमाल कराया। वही जब अज्ञात के खिलाफ मुकदमा लिखा गया था। तो आपाचे आरटीआर को डायल 100 नम्बर की पुलिस कैंट थाने लेकर आई। तो वो आपाचे आरटीआर बाइक थाने से गायब कहाँ हो गयी। आखिर आपाचे बाइक ले कौन गया।

ऐसा थाना व थाना प्रभारी किस काम का जब पीड़ित को अपने न्याय के लिए उच्च, अधिकारियों के दफ्तर का चक्कर लगाना पड़े।

कैंट थाने से न्याय नही मिलने पर पीड़ित पहुचा एसएसपी के द्वार

वही पीड़ित जब थका हारकर अन्त में कैंट थाने से न्याय नही मिल पाने पर पीड़ित ने बुधवार को एसएसपी कार्यालय पहुँच कर न्याय की गुहार लगायी। जहां से उन्ह जांच होने का आश्वसन मिला। अब देखना यह होगा की आखिर पीड़ित को न्याय कब मिलता है।

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