May 9, 2021

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वाराणसी : काशी में धूमधाम से मनाई गई रंगभरी एकादशी, बाबा भोले संग झूमते पहुचें भक्त-गण….

वाराणसी : काशी में धूमधाम से मनाई गई रंगभरी एकादशी। काशी विश्वनाथ की गलियों में गुजा डमरू की गड़गड़ाहट, हर-हर महादेव के नारों से। हवा में उड़ रही फूलों की पंखुड़ियों, अबीर-गुलाल और रंग इस बात की तस्दीक कर रहा था। कि बाबा भोलेशंकर माँ गौरा का गुण लेकर आ चुके है। चारो ओर हर्सोल्लास का माहौल था। गलियों में मौजूद हर व्यक्ति रंगों में सराबोर था।

बाबा काशी विश्वनाथ के दरबार के समीप स्थित महंत कुलपति तिवारी के आंगन में माँ पार्वती के गौने के उपलक्ष्य में महिलाएं पारंपरिक गीत गा रही थी। इसी उल्लास भरे माहौल में देवो के देव महादेव की पालकी विश्वनाथ गली में उतरी। पालकी उटरतर है पूरा माहौल हर-हर महादेव के नारों से गुज उठा।

इस दौरान पूरा गली भक्तों से पटी पड़ी थी। किसी भी स्थान पर कहि भी तिल रखने भर की भी जगह नही थीं। हर भक्त आगे पहुंचकर पालकी को अपने कंधे पर लेने के लिए आतुर था। ऐसे ही माहौल में भक्तों की अपार भीड़ व हर-हर महादेव के गुंजायमान के बीच करते बाबा की पालकी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में पहुचीं।

यहां से गौने की रस्म पूरी करने के लिए बाबा के शिवलिंग पर उनकी चल प्रतिमा को पालकी से उतार कर पूरे विधि-विधान से स्थापित किया गया। जब दुनिया होली के रंगों में रंगती है तो काशी वाले अपने बाबा भोलेनाथ का गुण कराने की तैयारी में रहते है। फाल्गुन पूर्णिमा के पूर्व पड़ने वाली एकादशी को काशी में धूमधाम से रंगभरी एकादशी मनाई गई।

भगवान शिव ने फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को माँ पार्वती से विवाह किया था। जिसके बाद फाल्गुन शुल्कपक्ष की एकादशी पर गौना लेकर माँ पार्वती को विदाई कराने काशी आ रही है और आज भी काशीवासी बाबा भोलेनाथ के साथ उसी हर्सोल्लास के साथ पहुंचे थे। इस उपलक्ष्य में काशीवासी रंगभरी एकादशी मनाते है।

इस दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत कुलपति तिवारी ने बताया कि यह होली नही बल्कि बाबा भोलेनाथ के लिए बहुत बड़ा रस्म है। जो बसन्त पंचमी के दिन बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव हुआ था। महाशिवरात्रि के दिन विवाह हुआ था। वही आज भोलेनाथ अपनी भार्या माँ पार्वती की विदाई कराने आए हैं। उन्होंने कहा कि आज से होली का पर्व शुरू हो जाएगा। महंत परिवार की तरफ बाबा का गुण कराने की परंपरा पिछले 350 वर्षों से चली आ रही है।

वीडियो : बाबा भोलेशंकर की गौने की बारात