May 9, 2021

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एक्जिट पोल के अनुरूप नही आये परिणाम तो क्या सही हो जाएगी EVM, आखिर हार का ठीकरा EVM पर क्यो…?

फाइल फोटो

दिल्ली : लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद मंगलवार को प्रमुख विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों ने चुनाव आयोग के दरवाजे पर दस्तक दिया है। वही बड़े नेताओं ने मुख्य चुआंव आयुक्त से कहा कि 23 मई को ईवीएम में दर्ज मतों की गणना वीवीपेट की पर्चियां से करवाई जाए।

विपक्षी नेताओं ने ईवीएम को लेकर ऊनी आशंकाओं के बारे में भी चुनाव आयोग को जानकारी दिया है। वही आयोग ने विपक्षी दलों को स्पष्ट कर दिया है कि मतगणना के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जो दिशा निर्देश दिए हैं उन्हीं के अनुरूप मतगणना होगी। प्रत्येक विधानसभा के 5 विधानसभा केंद्रों की ईवीएम के मतों की गणना वीवीपेट की पर्चियों से कारवाई जाएगी।

इस पर आयोग ने कहा यदि कोई गड़बड़ी होगी तो इन पांच ईवीएम के माध्यम से सामने आ जाएगी। आयोग ने विपक्षी दलों को आश्वस्त किया कि ईवीएम की मतगणना में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नही हो सकती है। उन्हीने कहा कि ऐसी कोई तकनीक नही है जिससे ईवीएम में दर्ज मतों में कोई बदलाव हो सके।

प्रतीकात्मक छवि

विपक्षी दलों का ईवीएम पर शक क्यो…?

अब सवाल ये उठता है कि विपक्षी दलों का ईवीएम पर शक क्यो कर रहे हैं? क्या एक्जिट पोल से विपक्ष में घबराहट है? यदि 23 मई को मतगणना के परिणाम एक्जिट पोल के विपरीत आ गए तो क्या ईवीएम सही हो जाएगी? ईवीएम पर तभी शक होगा, जब परिणाम विपक्षी दलों के खिलाफ आएंगे। इससे पहले भी ईवीएम को लेकर ओहले भी कई बार सवाल उठाए गए हैं।

वही इन सवालों का आयोग की ओर से ठोस जवाब भी दे दिया गया है। सब जानते है कि मतदान के बाद राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में ही ईवीएम को सील किया जाता है और फिर मतगणना के समय भी इन्ही प्रतिनिधियों की उपस्थिति में ही ईवीएम को तोड़ा जाता है।

अब ऐसे में ईवीएम में गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नजर नही दिखती है। विपक्षी दलों ने भाजपा और नरेंद्र मोदी को हराने में कोई कसर नही छोड़ी। यूपी में पुश्तैनी दुश्मन मायावती और अखिलेश यादव ने हाथ मिला लिया तो बिहार में कांग्रेस ने लालू प्रसाद यादव की पार्टी के साथ गठबंधन किया है।

वही बंगाल में तो ममता बनर्जी के समर्थकों ने हिंसा करने में कोई कसर नही छोड़ी राजनीति में यह सब जायज है। जो लोग ईवीएम पर सवाल उठा रहे है। उन्हें इस बात का भी याद रखना चाहिए कि कांग्रेस शासित प्रदेशों व अन्य प्रदेशों में जहां गैर भाजपा सरकारें हैं, वहां सरकार द्वारा नियुक्त जिला कलेक्टर ही जिला निर्वाचन अधिकारी की भूमिका निभाते हैं।

सब जानते है कि राज्य सरकारें अपने नजरिए से कलेक्टरों की नियुक्ति करती हैं। ऐसे में यदि किसी भी ईवीएम पर गड़बड़ी की आशंका होगी तो सबसे पहले निर्वाचन अधिकारी की ही जिम्मेदार होगी। जब विपक्षी सरकारों की निगरानी में ईवीएम रखी हुई है तो फिर गड़बड़ी कैसे की जा सकती है।